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बजट सत्र से पहले सियासी मंथन तेज, विपक्ष ने सरकार को घेरने की बनाई साझा रणनीति

संसद के आगामी बजट सत्र से पहले देश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। सत्तापक्ष जहां बजट के जरिए आर्थिक प्राथमिकताओं और विकास योजनाओं को सामने रखने की तैयारी में है, वहीं विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए साझा रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में विभिन्न विपक्षी दलों की लगातार बैठकें हो रही हैं, जिनमें संसद के भीतर एकजुट होकर सरकार से जवाब मांगने पर जोर दिया जा रहा है।
विपक्षी गठबंधन की बैठकों में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, महिला सुरक्षा, संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दे और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाने पर सहमति बनी है। नेताओं का मानना है कि बजट सत्र के दौरान इन मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करना जरूरी है, ताकि आम जनता से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब मिल सके।


सूत्रों के अनुसार, विपक्ष की रणनीति में संसद के दोनों सदनों में समन्वय, प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान संयुक्त रूप से मुद्दे उठाना, साथ ही बजट प्रस्तावों की गहन समीक्षा कर कमियों को उजागर करना शामिल है। इसके अलावा, सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले आर्थिक आंकड़ों और योजनाओं पर तथ्यात्मक बहस की तैयारी भी की जा रही है।
वहीं, सत्तापक्ष ने भी बजट सत्र को सुचारु रूप से चलाने और विकास से जुड़े एजेंडे को आगे बढ़ाने की बात कही है। सरकार का फोकस आर्थिक सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर रहने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, बजट सत्र से पहले संसद का राजनीतिक तापमान बढ़ चुका है। आने वाले दिनों में सदन के भीतर तीखी बहस, हंगामे और अहम फैसलों के संकेत मिल रहे हैं, जिस पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।

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