छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

जिला अस्पताल से बंदी फरार

सुरक्षा में भारी चूक, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

जांजगीर-चांपा
जिला चिकित्सालय जांजगीर से एक बंदी के फरार होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि फरार बंदी की पहचान पंचराम निषाद के रूप में हुई है, जिसे डायरिया और बुखार की शिकायत पर शुक्रवार दोपहर करीब 1.30 बजे जेल से जिला अस्पताल लाया गया था।

सूत्रों के अनुसार, उपचार के दौरान शनिवार सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर ने बंदी को दवा लिखी। इसी बीच बंदी की सुरक्षा में तैनात प्रहरी दवा लाने के लिए अस्पताल परिसर के बाहर चले गए, और इसी मौके का फायदा उठाकर बंदी फरार हो गया।

बताया जा रहा है कि बंदी के हाथ में लगी हथकड़ी ढीली थी, जिसके कारण उसने उसे निकालकर भागने में सफलता पा ली।
घटना के तुरंत बाद अस्पताल और जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।

पुलिस महकमे में मचा हड़कंप — सर्च ऑपरेशन जारी

फरारी की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। विशेष टीम गठित कर बंदी की तलाश के लिए आसपास के इलाकों में सघन खोजबीन की जा रही है।
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और संभावित ठिकानों पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सुरक्षा में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिस प्रहरी पर बंदी की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उसकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। विभागीय स्तर पर जांच और संभावित कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अस्पताल परिसर में CCTV कैमरों की संख्या और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यदि समय पर चौकसी बरती जाती, तो बंदी के फरार होने की यह घटना टल सकती थी।

प्रशासनिक बयान की प्रतीक्षा

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस प्रशासन ने कहा कि बंदी की तलाश जारी है और जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा।
वहीं सूत्रों के अनुसार, फरारी की इस घटना को सुरक्षा चूक का गंभीर मामला मानते हुए उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।

जिला अस्पताल से बंदी के भागने की यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अस्पताल और जेल प्रशासन के बीच समन्वय की कमी से गंभीर घटनाएँ कैसे घट सकती हैं। फिलहाल पुलिस के लिए यह इज्जत का सवाल बन गया है कि वह बंदी को कितनी जल्दी पकड़ पाती है।

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