अर्थशास्त्र

निजी क्षेत्र की विकास दर 10 महीने के निचले स्तर पर, मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं में सुस्ती

मुंबई/नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025 — ताज़ा प्राइवेट सेक्टर इंडेक्स (PMI) सर्वे के अनुसार भारत के निजी क्षेत्र की वृद्धि दिसंबर 2025 में पिछले 10 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से नई मांग और ऑर्डर में कमी के कारण हुई, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र दोनों पर दबाव पड़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि PMI का स्तर 50 से ऊपर होने के कारण यह संकेत देता है कि विस्तार अभी भी जारी है, लेकिन विकास की गति धीमी हो गई है। यह संकेत देता है कि घरेलू मांग कमजोर पड़ रही है, जिससे निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए आर्थिक निर्णयों में सतर्कता जरूरी है।

मुख्य बिंदु:

निजी क्षेत्र का PMI दिसंबर में निचले स्तर पर

नई मांग और ऑर्डर में गिरावट

रोजगार स्थिर, लेकिन विस्तार धीमा

व्यापारिक विश्वास में थोड़ी कमी

विशेष महत्व:

इस सुस्ती का असर मैन्युफैक्चरिंग, सेवा क्षेत्र और व्यापार निवेश पर पड़ सकता है।

निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए संकेत: संभावित आर्थिक चुनौतियों के लिए तैयारी जरूरी।

दीर्घकालिक दृष्टिकोण में यह अभी भी सकारात्मक है, लेकिन अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से सतर्क रहना जरूरी।
हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 में मजबूत रही है, लेकिन निजी क्षेत्र में सुस्ती और घरेलू मांग में मंदी से वर्ष के अंत में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं। सरकार और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर अब नजरें टिकी रहेंगी।

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