गुलाब में छिपा विरोध! अंबिकापुर के वकीलों ने फूलों से दी चेतावनी — मकान खाली करो वरना आंदोलन तय

अंबिकापुर / छत्तीसगढ़
जिला एवं सत्र न्यायालय अंबिकापुर के अधिवक्ताओं ने सोमवार को विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। तलवार या नारे नहीं — बल्कि हाथों में गुलाब लेकर वे पहुँचे गुलाब कॉलोनी और कलेक्ट्रेट परिसर में।
मकान मालिकों को फूल भेंट कर उन्होंने उनसे “विनम्र आग्रह” किया — कि कृपया मकान खाली करें, वरना अब अदालतें अदालतों से नहीं, सड़कों से आवाज़ उठाएँगी।
छह माह पहले गुलाब कॉलोनी को जिला एवं सत्र न्यायालय के नए भवन के निर्माण हेतु चिन्हित किया गया था।
लेकिन आधा साल बीत जाने के बाद भी यह कॉलोनी सरकारी मकानों से खाली नहीं हो सकी।
नतीजतन, सरगुजा कलेक्टर ने अंबिकापुर से 8 किलोमीटर दूर चटीरमा में नए न्यायालय भवन के लिए भूमि आवंटित कर दी थी।
इस फैसले का अधिवक्ता संघ ने कड़ा विरोध किया था, और मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय तक शिकायत पहुँची थी।
शिकायत के बाद तय हुआ कि न्यायालय परिसर के पास की सरकारी आवास कॉलोनी को तोड़कर वहीं नया भवन बनाया जाएगा,
लेकिन आज तक कर्मचारी मकान छोड़ने को तैयार नहीं।
इसी को लेकर आज वकीलों ने “गुलाब आंदोलन” की शुरुआत की —
गुलाब के फूल देकर, सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से निवेदन किया गया कि वे अपने आवास जल्द खाली करें, ताकि न्यायालय भवन निर्माण शुरू हो सके।
रिज़वान रिज़वी, अधिवक्ता:
“हमने आज भीख नहीं माँगी, सिर्फ़ विनम्रता दिखाई है — ताकि प्रशासन को समझ आए कि हमारी लड़ाई न न्याय से है, न सरकार से — बल्कि उस देरी से है जो न्याय के भवन के रास्ते में खड़ी है।”
जनार्दन त्रिपाठी, अधिवक्ता:
“हम अब भी संवाद चाहते हैं। अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो अगला कदम सख़्त होगा — और तब हाथों में गुलाब नहीं, कानून की मशाल होगी।”



