धान खरीदी में कार्रवाई पर सवाल: मंडी अधिनियम के उल्लंघन के आरोप, प्रशासनिक छापों की वैधता पर उठे गंभीर प्रश्न

रिपोर्टर-जय ठाकुर
जिले में धान खरीदी का सीजन शुरू होते ही प्रशासन की सक्रियता तेज हो गई है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में खाद्य, राजस्व और मंडी विभाग की संयुक्त टीम अवैध भंडारण और परिवहन के नाम पर लगातार छापामार कार्रवाई कर रही है।
लेकिन अब इन कार्रवाइयों की कानूनी वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप है कि प्रशासन जिस मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई कर रहा है, उसी अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा।
मंडी अधिनियम के अनुसार, किसी भी स्थल या वाहन से कृषि उपज जब्त करने के बाद संबंधित व्यक्ति को निर्धारित मंडी शुल्क का पाँच गुना जुर्माना जमा करने का अवसर दिया जाना अनिवार्य है। यदि वह जुर्माना जमा नहीं करता, तभी जब्ती या न्यायालयीन कार्रवाई की जा सकती है।
लेकिन शिकायतों के मुताबिक प्रशासनिक टीमें मौके पर यह प्रक्रिया पूरी किए बिना सीधे जब्ती की कार्रवाई कर रही हैं।



इतना ही नहीं, कानून में यह भी स्पष्ट है कि धान से भरे किसी भी वाहन की जब्ती के बाद इसकी सूचना तत्काल सक्षम न्यायालय को दी जानी चाहिए। लेकिन सूत्रों का कहना है कि अब तक की गई कई जब्तियों की सूचना न्यायालय को भेजी ही नहीं गई है।
मंडी अधिनियम यह भी कहता है कि जब्ती के बाद जब्ती पत्रक तुरंत संबंधित व्यक्ति को सौंपा जाना चाहिए, ताकि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बात रख सके।
लेकिन कई मामलों में मौके पर जब्ती पत्रक नहीं दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इसके अलावा जब्त की गई कृषि उपज की सूचना वर्ग-एक सक्षम न्यायालय को तत्काल भेजना अनिवार्य है, लेकिन इस प्रावधान का भी सही ढंग से पालन नहीं होने की बात कही जा रही है।
इन तमाम तथ्यों को देखते हुए अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि
क्या प्रशासन की ये कार्रवाइयाँ वास्तव में कानूनसम्मत हैं,
या फिर जल्दबाजी में मंडी अधिनियम के नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है।




