रायपुर: 17 करोड़ की PET-CT मशीन 5 साल से बंद — हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को फटकार

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की खामियों को लेकर हाई कोर्ट ने एक बार फिर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि 2019 में ₹17 करोड़ की लागत से खरीदी गई PET-CT मशीन आज तक पूरी क्षमता से शुरू नहीं हो सकी, जिससे गंभीर मरीजों को भारी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है।
मरीजों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
PET-CT स्कैन कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों की जांच में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
मशीन बंद रहने के कारण मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है, जहाँ एक टेस्ट का खर्च ₹22,000 तक है।
अदालत ने कहा कि “सरकारी मशीन बंद हो और मरीज महंगा इलाज खरीदने को मजबूर हों — यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।”
विशेषज्ञ स्टाफ और मरम्मत पर फिर से खर्च
सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने माना कि:
मशीन को चालू करने के लिए ₹2.5 करोड़ तक का अतिरिक्त खर्च आएगा।
इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ रेडिएशन टेक्नीशियन और मेडिकल फिजिसिस्ट की कमी बनी हुई है।
मशीन को आधुनिक अपडेट की भी जरूरत है।
हाई कोर्ट ने इस स्थिति को “गंभीर और दर्दनाक” बताते हुए कहा कि करोड़ों की मशीनें खरीदकर उन्हें निष्क्रिय छोड़ देना व्यवस्थागत विफलता का संकेत है।
अदालत का स्पष्ट निर्देश
हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से मशीन के संचालन की सटीक समयसीमा, स्टाफ की नियुक्ति और मरम्मत कार्यों की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि इतने वर्षों तक मशीन के उपयोग नहीं होने की जवाबदेही किसकी है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा सवाल
यह मामला एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, संसाधनों के उपयोग और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।
राज्य में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ रही है और PET-CT जैसी सुविधाएँ समय पर उपलब्ध न होना, जनस्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती है।




