राजिम कुंभ कल्प मेला बना आस्था का केंद्र, मेरवाड़ा अंचल में धार्मिक आयोजनों संग प्रशासनिक हलचल तेज

छत्तीसगढ़ के मेरवाड़ा अंचल में इन दिनों धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों की विशेष हलचल देखने को मिल रही है। राजिम स्थित त्रिवेणी संगम पर आयोजित राजिम कुंभ कल्प मेला श्रद्धा, आस्था और संस्कृति का बड़ा केंद्र बन गया है।
महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम पर लगने वाले इस कुंभ मेले में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संत, श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। संगम में स्नान, धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।
मेले को लेकर गरियाबंद जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी चिकित्सा शिविर, पेयजल व्यवस्था और नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
राजिम कुंभ के साथ-साथ मेरवाड़ा क्षेत्र में स्थानीय नागरिक जीवन से जुड़ी गतिविधियां भी सुर्खियों में हैं। सड़क, बिजली, पानी और बाजार व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सक्रियता बढ़ी हुई है। मेले के चलते स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है, जिससे ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था में रौनक आई है।
कुल मिलाकर, राजिम कुंभ कल्प मेला जहां एक ओर छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मेरवाड़ा अंचल में प्रशासनिक गतिविधियों और जनजीवन की गति भी तेज होती दिखाई दे रही है।




