रानी लक्ष्मीबाई जयंती : वीरता, स्वाभिमान और त्याग की प्रेरणा आज भी अमिट

जांजगीर-चांपा
भारतीय इतिहास में अदम्य साहस और पराक्रम की प्रतीक मानी जाने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती आज पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। स्वतंत्रता संग्राम की इस महान वीरांगना को याद करते हुए विभिन्न विद्यालयों, सामाजिक संगठनों और महिला समूहों ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए।
स्थानीय स्कूलों में बच्चों ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किए, जबकि कई स्थानों पर प्रभात फेरी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई केवल झांसी की रानी नहीं थीं, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष की जीवित ज्योति थीं, जिन्होंने स्वाभिमान और आज़ादी की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महान नायिका लक्ष्मीबाई ने 23 साल की उम्र में जिस वीरता के साथ अंग्रेजों का सामना किया, वह आज भी देश की हर बेटी और हर युवा के लिए प्रेरणास्रोत है। “झाँसी नहीं दूँगी” का उनका संकल्प आज भी देशभक्ति और साहस का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है।
जिले में आयोजित कार्यक्रमों में महिलाओं और युवतियों ने रानी लक्ष्मीबाई को नारी शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक बताते हुए कहा कि आज के समय में भी उनका जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और निर्भीकता का संदेश देता है।
सरकारी कार्यालयों और विद्यालयों में भी रानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके योगदान को याद किया गया।
देश इस महान स्वतंत्रता सेनानी के साहस, नेतृत्व और बलिदान को सदैव नमन करता है।




