छत्तीसगढ़

25 साल बाद इंद्रावती में दिखा दुर्लभ ऊदबिलाव, वन्यजल संरक्षण के लिए अहम संकेत

छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिज़र्व में करीब ढाई दशक बाद दुर्लभ प्रजाति स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव (Lutrogale perspicillata) की उपस्थिति दर्ज की गई है। यह प्रजाति एशिया के मीठे जल तंत्रों में पाई जाती है और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सूची में वulnerable (संकटग्रस्त) श्रेणी में आती है।

वन अधिकारियों की टीम ने हाल ही में इंन्ड्रावती नदी तट पर सर्वेक्षण के दौरान इस प्रजाति के स्पष्ट फुटप्रिंट्स, स्कैट और ताजा गतिविधियों के प्रमाण पाए। यह राज्य में नदी-आधारित पारिस्थितिकी के स्वस्थ होने और जैव-विविधता के पुनरुत्थान का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऊदबिलाव का वापस दिखाई देना यह दर्शाता है कि क्षेत्र में जल की गुणवत्ता, भोजन श्रृंखला और आवास में सुधार हो रहा है। वहीं, इसके साथ कई चुनौतियाँ भी सामने हैं —

नदी तंत्र में बढ़ता मानव हस्तक्षेप,

अवैध मछली शिकार,

और नदी किनारों पर होने वाली गतिविधियों का दबाव इसकी सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।

वन विभाग ने अब उस क्षेत्र को संवेदनशील ज़ोन घोषित करने और संरक्षण के लिए विशेष प्रोटोकॉल बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह खोज प्रदेश में मीठे पानी के वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा दे सकती है।

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