
ब्यूरो रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव के नेतृत्व में बीजापुर, रायपुर और बलौदाबाजार जिलों के लिए कुल 5 प्रमुख सड़कों (74 किलोमीटर) के निर्माण व उन्नयन की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है—तेज़ रफ़्तार, बेहतर सुरक्षा और उच्च गुणवत्ता वाली सड़कें।
बीजापुर: सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
बीजापुर जिले में पिनकोंडा–चेरपाल मार्ग पर 42.56 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस रूट की खासियत यह है कि यहां 80 छोटे-बड़े पुल-पुलियों का निर्माण प्रस्तावित है। इस परियोजना पर ₹47.64 करोड़ की लागत आएगी, जिससे दूरस्थ इलाकों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।
रायपुर: राजधानी का इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड
राजधानी रायपुर में तीन अहम कार्य होंगे—
भानसोज–बरछा–मालीडीह–खौली मार्ग: 9 किमी सड़क का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण, लागत ₹20.17 करोड़।
चरौदा–धरसींवा: 3.20 किमी का फोरलेन गौरवपथ, लागत ₹14.81 करोड़।
एक्सप्रेस-वे: रेलवे स्टेशन से शदाणी दरबार तक 12.10 किमी हिस्से में डामर नवीनीकरण, लागत ₹14.43 करोड़।
बलौदाबाजार: सुगम यातायात की पहल
बलौदाबाजार में रिसदा बायपास मार्ग (पुल-पुलियों सहित) का निर्माण 7 किमी लंबाई में किया जाएगा। इस पर ₹11.91 करोड़ खर्च होंगे, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव कम होगा।
कड़े नियम: ‘नो सब-लेटिंग’ पॉलिसी लागू
सरकार ने इस बार निर्माण कार्यों में सख्त अनुशासन तय किया है—
स्वयं काम अनिवार्य: ठेकेदार किसी अन्य को काम सब-लेट नहीं कर सकेंगे, न ही पावर-ऑफ-अटॉर्नी मान्य होगी।
समयसीमा बाध्यकारी: एग्रीमेंट में तय समय के भीतर काम पूरा करना होगा।
क्वालिटी से समझौता नहीं: निर्माण मानकों की कड़ी निगरानी होगी।
सुरक्षा गारंटी: अनुबंध से पहले एडीशनल परफॉर्मेंस सिक्योरिटी (APS) जमा करना अनिवार्य।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, “हमारा जोर सिर्फ सड़कें बनाने पर नहीं, बल्कि ऐसी टिकाऊ और सुरक्षित सड़कें विकसित करने पर है, जो आम जनता के सफ़र को आसान बनाएं।”
इन परियोजनाओं के पूरा होने से ग्रामीण-शहरी कनेक्टिविटी, यातायात सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।




