राजनांदगांव

आधुनिक तकनीक से खेती में क्रांति—राजनांदगांव के किसान सुरेश सिन्हा ने बढ़ाई आमदनी, पॉलीहाउस में उगा रहे टमाटर-गोभी और लौकी

राजनांदगांव

अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों में अब तेजी से आधुनिक तकनीक अपनाने का चलन बढ़ रहा है। समय बदल रहा है, और उसके साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी। परंपरागत खेती से आगे बढ़कर किसान अब नई तकनीक से बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है डोंगरगढ़ ब्लॉक के ग्राम गातापारखुर्द के किसान सुरेश सिन्हा ने।

पारंपरिक खेती को छोड़ा, आधुनिक खेती से बढ़ाई आमदनी

सुरेश सिन्हा पहले अपने खेतों में पारंपरिक तरीके से धान की फसल उगाया करते थे, लेकिन बीते कुछ वर्षों से उन्होंने खेती में आधुनिक तकनीकों का उपयोग शुरू किया। इसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ा और उनकी कमाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

उन्होंने पॉलीहाउस तकनीक अपनाकर टमाटर और फूल गोभी का उत्पादन शुरू किया है। इसके अतिरिक्त वे खुले खेत में आधुनिक पद्धति से लौकी भी उगा रहे हैं। मार्केट में टमाटर की लगातार बढ़ती मांग का फायदा उन्हें भरपूर मिला है।
सुरेश अपने खेत के ताज़ा टमाटरों को कोरबा, कोलकाता, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा और आसपास के स्थानीय बाजारों में सप्लाई करते हैं, जिससे उन्हें अब तक लगभग 2 लाख 35 हजार रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है।

सरकारी योजनाओं से मिला बड़ा समर्थन

कृषि को उन्नत बनाने में सरकार की योजनाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पॉलीहाउस निर्माण के लिए उन्हें 17 लाख रुपए का अनुदान मिला।

सब्जी स्टोरेज पैक हाउस के लिए 2 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ।

दवा छिड़काव के लिए स्ट्रिप मशीन खरीदने पर 50% अनुदान भी दिया गया।

कुल 15 एकड़ जमीन वाले सुरेश में से 8 एकड़ में धान और 7 एकड़ में सब्जियों की खेती कर रहे हैं।

लौकी उत्पादन से मिली बड़ी कमाई

इस वर्ष लगभग डेढ़ एकड़ में लगाए गए लौकी के फसल ने रिकॉर्ड उत्पादन दिया। सुरेश को 35 टन लौकी की उपज हुई, जिससे उन्हें 50% शुद्ध आमदनी मिली। उन्होंने बताया कि वे हमेशा बाजार की मांग देखकर ही सब्जी उत्पादन का चयन करते हैं ताकि कम समय में अधिक लाभ हो सके।

किसानों के लिए संदेश और सरकार से अपील

सुरेश ने कहा कि कृषि योजनाओं का वृहद प्रचार-प्रसार होना आवश्यक है ताकि हर किसान इनका लाभ उठा सके। खेती में सबसे अधिक खर्च मजदूरों पर आता है, ऐसे में सब्सिडी वाले कृषि उपकरण गांव-गांव पहुंचें तो कृषि में क्रांति आ सकती है।

उन्होंने किसानों से अपील की—
“परंपरागत धान की खेती में पानी अधिक लगता है और समय भी। सब्जी की खेती करें, इससे कम समय में ज्यादा मुनाफा और पानी की बचत दोनों संभव है।”

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