अर्थशास्त्र

रुपया अब भी दबाव में — डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड कमजोरी, RBI के प्रयासों के बावजूद गिरावट जारी

भारतीय मुद्रा रुपया पिछले कुछ हफ्तों से लगातार कमजोरी दिखा रहा है और आज भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा है। डॉलर के मजबूत रुझान, वैश्विक निवेशकों की बेचवाली व यूएस‑भारत व्यापार समझौते की अनिश्चितता जैसी वजहों से लगातार गिरावट बनी हुई है।

क्या है स्थिति:

  • 15 दिसंबर 2025 को रुपया 90.74 के स्तर तक गिर गया, जो अब तक का एक नया रिकॉर्ड निचला स्तर है।
  • यह गिरावट इस साल करीब 6% तक रही है, जिससे रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल हुआ है।

RBI का प्रयास और हस्तक्षेप:
भारतीय रिज़र्व बैंक ने गिरावट को सीमित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया है और कुछ बॉन्ड खरीदारी की, ताकि बड़ी गिरावट को रोका जा सके। तथापि, स्थायी मजबूती नहीं आ पाई है क्योंकि पूंजी का बहिर्वाह जारी है और डॉलर की मांग बनी हुई है।

दुनिया और व्यापार प्रभाव:

  • अमेरिकी‑भारत व्यापार डील में देरी टिकाऊ निवेश धारणा पर नकारात्मक असर डाल रही है।
  • निर्यातकों को कुछ लाभ हो सकता है, किंतु आयात महंगा होने से घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञ टिप्पणी:
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, गर्भित निवेशकों की बिकवाली और डॉलर की मजबूती रुपये को मजबूती से ऊपर उठने नहीं दे रही है। RBI द्वारा किए गए प्रयास फिलहाल वोलाटिलिटी को नियंत्रित रखने तक सीमित हैं, न कि दीर्घकालिक मजबूती का संकेत दे रहे हैं।

क्या इसका असर होगा?

  • महंगी आयातित वस्तुएँ (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल आदि) की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उपभोक्ता महंगाई बढ़ सकती है।
  • इसके अलावा, निर्यात कुछ सेक्टरों को लाभ दे सकता है लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का भरोसा प्रभावित रहा है।
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