सक्ती जिला बना छत्तीसगढ़ का सबसे पारदर्शी पीडीएस मॉडल — रिकॉर्ड लाभान्वित परिवार और मजबूत डिजिटल सिस्टम

नवगठित सक्ती जिला आज पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस का एक आदर्श मॉडल बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के नेतृत्व में जिले ने पारदर्शिता, डिजिटल व्यवस्था और व्यापक जनसेवा को केंद्र में रखकर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। जिला गठन के बाद सबसे बड़ी उपलब्धि पात्र हितग्राहियों की संख्या में दर्ज की गई रिकॉर्ड वृद्धि है—जिला बनने से पहले जहाँ 2 लाख 8 हजार 529 राशन कार्ड थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 2 लाख 42 हजार 661 हो गई है। यानी 34 हजार से अधिक नए परिवारों को पीडीएस के दायरे में जोड़कर प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार भोजन सुरक्षा से वंचित न रहे।
खाद्यान्न आबंटन में भी जिले ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। चावल का आबंटन 67,036 मीट्रिक टन से बढ़कर 76,588 मीट्रिक टन हो गया है। इसी तरह रिफाइंड नमक का आबंटन 1,831 मीट्रिक टन से बढ़कर 2,244 मीट्रिक टन और शक्कर का आबंटन 1,828 मीट्रिक टन से बढ़कर 2,241 मीट्रिक टन हो गया है। तीनों आवश्यक वस्तुओं में 400 से 900 मीट्रिक टन तक की यह बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि जिले ने बढ़ती आबादी और नए जुड़े हितग्राहियों के अनुरूप सप्लाई चेन को मजबूत किया है, जिससे हर पात्र परिवार को समय पर और पूरा राशन मिल सके।
जिले में वितरण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए उचित मूल्य दुकानों की संख्या भी बढ़ाई गई है। पहले 341 दुकानें थीं, जो अब बढ़कर 349 हो गई हैं, जिससे ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लोगों को अधिक निकटता में राशन उपलब्ध हो रहा है। साथ ही डिजिटल ट्रांसपेरेंसी को बढ़ावा देते हुए जिले की सभी दुकानों को ई-पॉस मशीनों से जोड़ दिया गया है। इससे डिजिटल ट्रांजैक्शन, ऑनलाइन सत्यापन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो पाई है, जिससे पीडीएस वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है।
कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देश पर जिला प्रशासन लगातार दुकानों, गोदामों और उपभोक्ता भंडारों का निरीक्षण कर रहा है। खाद्यान्न की गुणवत्ता, स्टॉक प्रबंधन और वितरण प्रक्रिया पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे। नवगठित होने के बावजूद सक्ती जिले का यह पीडीएस मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है और यह साबित करता है कि पारदर्शी, डिजिटल और दृढ़ प्रशासन ही जनकल्याण को प्रभावी रूप से सशक्त बना सकता है।




