शौर्य को सलाम: नक्सल मोर्चे के शहीदों और बहादुर जवानों को मिला राज्य सम्मान

वीरता, समर्पण और बलिदान को मिला सम्मान — छत्तीसगढ़ पुलिस का गौरव बढ़ा
रायपुर/दंतेवाड़ा
नक्सल मोर्चे पर अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले शहीद जवानों के परिजनों और 12 बहादुर पुलिस जवानों को राज्य पुलिस प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह उन सभी वीरों को समर्पित था जिन्होंने प्रदेश में शांति स्थापित करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी या जोखिम भरे अभियानों में उल्लेखनीय योगदान दिया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने शहीद जवानों के परिजनों को सम्मान-पत्र और प्रतीक चिह्न भेंट कर नमन किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने मौन रखकर उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने नक्सल मोर्चे पर देश की एकता और अखंडता की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
राज्य सरकार और पुलिस विभाग की पहल
राज्य पुलिस विभाग ने यह आयोजन न केवल वीरता के सम्मान के रूप में किया, बल्कि शहीद परिवारों को यह संदेश देने के लिए भी कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। पुलिस महानिदेशक ने कहा —
“हमारे जवानों ने जिस साहस के साथ मोर्चे पर डटे रहकर नक्सल उन्मूलन की दिशा में काम किया है, वह प्रेरणा का स्रोत है। यह सम्मान हमारे शहीद भाइयों की अमर गाथा को जीवित रखने का प्रयास है।”
सम्मानित किए गए 12 जवानों में से अधिकांश ने हाल के महीनों में सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में चलाए गए नक्सल विरोधी अभियानों में असाधारण प्रदर्शन किया था।
परिजनों की आंखों में गर्व और भावनाएं
समारोह के दौरान शहीद जवानों के परिजन भावुक नजर आए, लेकिन उनके चेहरों पर गर्व साफ झलक रहा था। कई परिजनों ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके बेटे और पति ने देश के लिए बलिदान दिया। राज्य सरकार की ओर से उन्हें सहयोग और सम्मान मिलने पर उन्होंने आभार व्यक्त किया।
मनोबल बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
यह सम्मान समारोह न केवल वीर जवानों की स्मृति को जीवित रखने का प्रतीक बना, बल्कि इससे पुलिस बल के मनोबल को भी नई ऊर्जा मिली।
अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से जवानों में कर्तव्यनिष्ठा और देशप्रेम की भावना और मजबूत होती है।
नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात जवानों का साहस और प्रतिबद्धता छत्तीसगढ़ की शांति स्थापना की रीढ़ है। ऐसे कार्यक्रम न केवल परिवारों के आँसू पोंछते हैं, बल्कि हर वर्दीधारी के कंधे पर जिम्मेदारी और गर्व दोनों बढ़ाते हैं।




