जांजगीर-चांपा

छत्तीसगढ़ के पीथमपुर में रेत माफिया हावी — अवैध खनन से नदियों का सीना छलनी, प्रशासन की कार्यवाही नाकाफी

पीथमपुर

छत्तीसगढ़ के पीथमपुर क्षेत्र में रेत माफिया का आतंक बढ़ता जा रहा है। नदी किनारों से धड़ल्ले से रेत की अवैध खुदाई और परिवहन हो रहा है, जिससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि सरकारी राजस्व की भी भारी हानि हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं।

छत्तीसगढ़ के पीथमपुर इलाके में इन दिनों अवैध रेत खनन का कारोबार जोरों पर है। रेत माफिया दिन-रात नदी के तटों से रेत निकालकर ट्रैक्टर और हाइवा वाहनों में भरकर बेच रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ये वाहन रात के अंधेरे में नदियों से रेत निकालकर शहरों तक पहुंचाते हैं, और प्रशासन को सब जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

स्थानीय निवासी रामलाल ध्रुव ने बताया

“रात में दर्जनों ट्रैक्टर नदी किनारे आते हैं, मशीनों से रेत निकाली जाती है। आवाज़ उठाने पर माफिया धमकी देते हैं। पुलिस और राजस्व अमला जानते हुए भी मौन है।”

रेत की यह लूट न केवल पर्यावरण के लिए खतरा बन चुकी है, बल्कि नदियों का प्राकृतिक स्वरूप भी बिगड़ रहा है। अनियंत्रित खनन के चलते जलस्तर घट रहा है और गांवों की खेती व पेयजल स्रोत भी प्रभावित हो रहे हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रेत का अंधाधुंध दोहन भविष्य में नदी के बहाव को बदल सकता है, जिससे बाढ़ और जल संकट जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

वहीं, प्रशासन का दावा है कि अवैध खनन पर निगरानी के लिए टीम गठित की गई है और जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पीथमपुर में रेत माफिया की पकड़ कितनी मजबूत है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि तमाम शिकायतों और चेतावनियों के बावजूद अवैध खनन का सिलसिला थम नहीं रहा। अब देखना होगा कि प्रशासन की कार्रवाई कब दिखती है और नदियों को इस लूट से कब राहत मिलती है।

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