बलोद

सत्संग ने मिटाई सामाजिक दूरियां, ग्राम सांकरा करहीबदर में एकता का संदेश

जिला: बालोद
रिपोर्टर: के पी चंद्राकर

बालोद जिले के ग्राम सांकरा करहीबदर में आयोजित भागवत कथा में पं. डिलेश्वर पांडे ने समाज में बढ़ते विभाजन—जाति, वर्ग, विचार और भाषा के नाम पर—के बीच सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सत्संग सभी विभाजनों से ऊपर उठकर मानवता और श्रद्धा को महत्व देता है। कथा के मंच पर हर व्यक्ति समान होता है, और केवल श्रद्धा ही पहचान होती है।

पं. डिलेश्वर पांडे ने बताया कि जब पूरा गांव या समाज एक साथ कथा में बैठता है, तो सामाजिक दूरी स्वतः कम हो जाती है। भागवत कथा आज के समय में समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति बनकर उभरती है, जो व्यक्ति के “मैं” से सामूहिक “हम” की भावना को विकसित करती है।

पं. डिलेश्वर पांडे (आचार्य): “भक्त और भगवान के बीच संबंध सर्वोपरि है, न कि सामाजिक पहचान।”

संजय सिन्हा (ग्रामवासी): “कथा सुनकर हम सभी एकजुट महसूस करते हैं, जाति या वर्ग की दूरी गायब हो जाती है।”

विवरण:
इस आयोजन में ग्रामवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए। पं. डिलेश्वर पांडे फुल माला पहने और लंबी दाढ़ी में एक आचार्य की छवि लिए हुए थे। सभी ग्रामवासी तिलक लगा कर कथा में बैठे और एकता और सामूहिक भावना का अनुभव किया। इस तरह की पहल सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती है।

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