स्कूल बंद, शिक्षक गायब… और सवाल पूछने पर पत्रकार को FIR की धमकी

लोकेशन — बलरामपुर, शंकरगढ़
छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। शंकरगढ़ विकासखंड के कई प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के आने के बावजूद शिक्षकों के अनुपस्थित रहने की शिकायतें सामने आई हैं। हालात इतने खराब हैं कि जब पत्रकार ने इस मुद्दे पर सवाल उठाया तो विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने उल्टा FIR की धमकी दे दी।
स्कूल समय, सरकारी नियम और जमीनी हकीकत
छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार सभी सरकारी स्कूल सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक खुले रहने चाहिए और बच्चों को नियमित तौर पर मिड-डे-मील भी मिलना चाहिए।
सरकार इस व्यवस्था पर हर साल लाखों रुपये खर्च कर रही है ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण मिल सके।
लेकिन शंकरगढ़ विकासखंड की हकीकत इन दावों को पूरी तरह झुठलाती दिख रही है।



बच्चों और ग्रामीणों का आरोप — “स्कूल में ताला लटकता है, शिक्षक महीनों से गायब”
प्राथमिक विद्यालय बूढ़ापारा
प्राथमिक विद्यालय कंवर टोली बादा
दोनों जगहों पर स्कूल समय में ताला लटका मिला।
बच्चे बैग लेकर स्कूल आते हैं, लेकिन पढ़ाने वाला कोई नहीं होता। कई बच्चे पहाड़ी के पास बैठकर घंटों शिक्षक का इंतजार करते दिखे।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि—
प्रधानपाठिका बेला मिश्रा जुलाई से स्कूल नहीं आ रही हैं।
स्कूल की रसोइया गीता पैकरा ने भी पुष्टि की कि —
“मैडम पिछले एक महीने से स्कूल नहीं आई हैं।”
ग्रामीणों ने बताया कि उनके घर के ठीक सामने से स्कूल का रास्ता जाता है।
अगर प्रधानपाठिका आतीं, तो वे जरूर उन्हें देखते।
पत्रकार को बीईओ की धमकी — “खबर छापोगे तो FIR कराऊँगा!”
जब पत्रकार ने इस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) एम.डी. स्माइल खान से बात की और स्कूल बंद रहने का कारण पूछा, तो शिक्षा अधिकारी ने उल्टा पत्रकार को ही डांटना शुरू कर दिया और धमकी दी —
“तुम शिक्षकों को परेशान करोगे या खबर चलाओगे, तो तुम्हारे खिलाफ FIR करा दूंगा।”
पत्रकार के पास इस बातचीत का कथित ऑडियो भी है, जिसकी हम सत्यता की पुष्टि नहीं करते, लेकिन सवाल यह ज़रूर उठता है कि—
क्या सरकारी स्कूल बंद होने पर भी पत्रकार चुप रहे?
क्या जिम्मेदार अधिकारी अपनी लापरवाही छुपाने के लिए धमकियों का सहारा ले रहे हैं?
शिक्षकों की अनुपस्थिति पर कार्रवाई की बजाय पत्रकार पर FIR की बात क्यों?
बड़ा सवाल — लापरवाही पर पर्दा क्यों?
जहां बच्चे पहाड़ों में बैठकर शिक्षक का इंतजार कर रहे हैं, वहीं BEO का यह रवैया कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या अधिकारी लापरवाह शिक्षकों पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं?
क्या विभाग में अंदरूनी ढील और मनमानी को बचाने की कोशिश हो रही है?
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कामकाज पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।




