शक्ति जिले के पतेरापाली धान उपार्जन केंद्र में किसानों की गंभीर समस्या

रिपोर्टर – अमन कुमार सोनी / लोकेशन – पतेरापाली
40 प्रतिशत धान काटे जाने का आरोप, शासन-प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
शक्ति जिले के धान उपार्जन केंद्र पतेरापाली में किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। आज उपार्जन केंद्र में लगभग 15 किसानों के टोकन कटे हुए थे, लेकिन किसानों का आरोप है कि उनकी धान की खरीद के दौरान लगभग 40 प्रतिशत तक धान काटा जा रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि धान पूरी तरह सूखा और गुणवत्ता के अनुरूप होने के बावजूद उसे नमी, गुणवत्ता या अन्य कारणों का हवाला देकर अस्वीकार या कटौती की जा रही है। इससे किसान बेहद आक्रोशित और मानसिक रूप से परेशान हैं।
“सुनने वाला कोई नहीं”
परेशान किसानों का आरोप है कि वे अपनी समस्या लेकर स्थानीय अधिकारियों से लेकर शासन-प्रशासन तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही है। किसानों का कहना है कि उपार्जन केंद्रों पर मनमानी चल रही है और जवाबदेही तय नहीं की जा रही।


सरकार की मंशा पर सवाल
किसानों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकार की मंशा किसानों से कम से कम धान खरीदने की है। किसानों का कहना है कि एक ओर सरकार सार्वजनिक मंचों से यह दावा कर रही है कि “किसानों का एक-एक दाना खरीदा जाएगा”, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
कुछ किसानों ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के आने के बाद से पूरे छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर समस्याएं बढ़ी हैं और उपार्जन केंद्रों पर किसानों को आए दिन परेशान होना पड़ रहा है।
आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर किसान
सबसे चिंताजनक बात यह है कि किसानों का कहना है कि आर्थिक तंगी, कर्ज और धान न बिक पाने की स्थिति के कारण कई किसान मानसिक रूप से टूट चुके हैं और कुछ मामलों में किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। किसानों ने इसे शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता का परिणाम बताया।




