भारत में कैंसर के मामलों में 12% की तेज बढ़ोतरी, आईसीएमआर की नई रिपोर्ट ने दी चेतावनी — युवा आबादी में भी बढ़ रहा जोखिम

भारत में कैंसर तेजी से एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार देश में कैंसर के मामलों में पिछले एक वर्ष में 12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 30 से 45 वर्ष की आयु वाले युवाओं में कैंसर की दर तेजी से बढ़ रही है, जो पहले आमतौर पर बुजुर्गों में अधिक देखा जाता था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जीवनशैली, प्रदूषण, तंबाकू उत्पादों का बढ़ता इस्तेमाल, अनियमित खानपान और तनाव इस बढ़ोतरी के मुख्य कारण हैं।
कौन से कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं?
ICMR के अनुसार भारत में निम्न प्रकार के कैंसरों में सबसे तेज वृद्धि देखी जा रही है—
लंग कैंसर (पुरुष और महिलाएँ दोनों)
ब्रैस्ट कैंसर (महिलाओं में सबसे आम)
ओरल कैंसर (तंबाकू उपयोग के कारण)
सर्वाइकल कैंसर
कोलोरेक्टल कैंसर
महिला और पुरुष दोनों में बढ़ते मामलों के पीछे प्रमुख कारण जीवनशैली और वातावरण में तेजी से आए बदलाव बताए जा रहे हैं।
युवाओं में कैंसर क्यों बढ़ रहा? विशेषज्ञों के अनुसार 4 बड़े कारण
1. जंक फूड और हाई-शुगर डाइट
2. कम नींद और हाई-स्ट्रेस लाइफस्टाइल
3. प्रदूषण स्तर में भारी वृद्धि
4. अल्कोहल और तंबाकू सेवन
विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल और लैपटॉप की बढ़ती स्क्रीन टाइम भी शरीर के हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित करती है, जिससे कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ता है।
कैंसर के शुरुआती लक्षण—जिन्हें नजरअंदाज न करें
शरीर में लगातार थकान
असामान्य गांठ या सूजन
अचानक वजन घटना या बढ़ना
लंबे समय तक बुखार
अनियंत्रित ब्लीडिंग
खाने में दिक्कत, लगातार खांसी या आवाज बैठना
डॉक्टर्स का कहना है कि शुरुआती चरण में कैंसर का उपचार सबसे प्रभावी होता है, इसलिए लक्षण दिखते ही जांच करवाना जरूरी है।
ICMR ने दिए निर्देश: नियमित स्क्रीनिंग से बच सकती हैं लाखों जानें
ICMR ने देश की जनता को जागरूक करते हुए कहा है कि—
40 वर्ष से अधिक आयु वालों को साल में एक बार कैंसर स्क्रीनिंग करवानी चाहिए।
महिलाओं को ब्रैस्ट और सर्वाइकल कैंसर की नियमित जांच करवानी चाहिए।
तंबाकू और शराब सेवन न करने पर ओरल और लंग कैंसर का जोखिम 70% तक कम हो सकता है।
सरकार भी बढ़ा रही प्रयास
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि आने वाले महीनों में देशभर में कैंसर अर्ली-डिटेक्शन प्रोग्राम का विस्तार किया जाएगा। साथ ही AI आधारित डायग्नोस्टिक तकनीकें भी शामिल की जा रही हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी समय पर जांच और इलाज संभव हो सके।




