श्रद्धा बनी हादसा: वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में भीड़ ने ली 10 लोगों की जान

आंध्र प्रदेश/श्रीकाकुलम/काशीबुग्गा
1 नवंबर 2025 को एक धार्मिक अवसर देवउठनी एकादशी के दौरान, आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित काशीबुग्गा के वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में भीड़ नियंत्रण न होने के कारण भगदड़ मची।
प्रारंभिक रिपोर्ट्स कहती हैं कि इस घटना में कम-से-कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों श्रद्धालु घायल हुए हैं।
घटना का कारण मुख्यतः भारी भीड़ और दर्शन-प्रवेश उपरांत रेलिंग या सुरक्षा बाउंड्री के टूटने या ढहने से धक्का-मुक्की का प्रसार बताया जा रहा है।
घायल लोगों को तत्काल स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, राहत-बचाव का काम तत्काल शुरू हो गया है।
घटना
मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से ही मौजूद थे, खासकर एकादशी के पवित्र दिन होने के कारण।
भगदड़ की शुरुआत उस समय मानी जा रही है जब दर्शन लाइन में लगी रेलिंग (रॉडिंग) टूट गई और लोग गिरने लगे, जिससे अचानक भय और धक्का-मुक्की बढ़ गई।
वीडियो और स्थानीय गवाहों की रिपोर्ट में महिलाएँ, बच्चों सहित श्रद्धालु मदद के लिए चिल्लाते रहे।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
एन. चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री) ने इस हादसे को बेहद दुखद बताया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है।
उन्होंने अधिकारियों को घायलों को सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने, राहत कार्य सुनिश्चित करने तथा घटना के कारणों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि मजिस्ट्रेटिया जांच का आदेश दिया गया है और आगे भीड़-नियंत्रण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।
महत्व और असर
यह घटना धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन की कमी को उजागर करती है।
पुरानी, अपेक्षाकृत कम-प्रसिद्ध मंदिरों में भी भारी श्रद्धालु संख्या आने पर आपात एवं नियंत्रण व्यवस्थाओं की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है।
इसके अलावा, मृतकों और घायलों के लिए तुरंत राहत-सुविधा का उपलब्ध होना भी चर्चा का विषय बन गया है।
मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि अभी घटनास्थल पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शियों व CCTV फुटेज की सहायता से घटना के क्रम, टूटे हुए रेलिंग-बाउंड्री के कारण एवं भीड़ के व्यवहार की विस्तृत जांच होगी।
भविष्य में इसी तरह के आयोजनों के लिए मंदिर तथा राज्य सरकार को भीड़-प्रवेश नियंत्रित करने, आपातकालीन निकलने वाले मार्ग सुनिश्चित करने आदि पर विशेष फोकस करना होगा।




