सिरपुर विश्व धरोहर की ओर बढ़ा कदम: 34 प्राचीन स्थलों का संयुक्त सर्वे, अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विकास की तैयारी

छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक नगर सिरपुर को विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) में शामिल कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) और सिरपुर एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (SADA) की संयुक्त विशेषज्ञ टीम ने सिरपुर व आसपास के प्राचीन स्थलों का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान टीम ने 34 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों की स्थिति, संरचना, सुरक्षा और पर्यटन संभावनाओं का मूल्यांकन किया। इन सभी स्थलों को एक थीमैटिक क्लस्टर में विकसित करने की योजना पर गंभीरता से चर्चा की गई, ताकि सिरपुर को एक समग्र और संरक्षित सांस्कृतिक धरोहर क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।


क्या-क्या होंगे बड़े बदलाव?
पर्यटक सुविधाओं में बड़ा सुधार
नए साइन बोर्ड, विज़िटर सेंटर, ऑडियो-गाइड, विश्राम स्थल, स्वच्छता व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को उन्नत करने की तैयारी है।
ईको-फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट व्यवस्था
भारी वाहनों की आवाजाही कम कर, बैटरी आधारित शटल सेवाएँ और पैदल मार्ग विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि विरासत को नुकसान न पहुँचे।
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर संरक्षण कार्य
ईंट-निर्माण, स्तूप, विहार, मंदिर संरचना और खुदाई से जुड़े प्राचीन अवशेषों को विश्व धरोहर मानकों के अनुसार सुरक्षित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
क्या है सिरपुर का महत्व?
सिरपुर, महानदी तट पर बसा एक समृद्ध ऐतिहासिक नगर है, जिसे शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं का अद्वितीय संगम माना जाता है। लक्ष्मण मंदिर, आनंदप्रभु कुटी विहार, सूरंग टीला, बौद्ध विहारों के अवशेष और कई दुर्लभ मूर्तियां इसे भारतीय इतिहास का अनमोल अध्याय बनाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिरपुर विश्व धरोहर सूची में शामिल होता है, तो यह कच्छ, हम्पी, महाबलीपुरम जैसे विश्व धरोहर स्थलों की श्रेणी में आकर अंतरराष्ट्रीय पहचान और पर्यटन में बड़ी वृद्धि ला सकता है।
सरकार की तैयारी
राज्य सरकार और SADA ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में आधारभूत संरचना सुधार, रिसर्च दस्तावेज तैयार करने और UNESCO मूल्यांकन के लिए डॉसियर बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।




