जांजगीर-चांपा

चलती मौत” बने छोटा हाथी वाहन – परिवहन विभाग की लापरवाही से सड़कों पर मंडरा रहा खतरा

बिना रेड संकेत, बिना सुरक्षा कवच – लोहे के पाइप से लदे वाहन मौत को दे रहे खुला न्योता, विभाग बना मूकदर्शक

जांजगीर-चांपा

जिले में सड़क सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाते छोटे व्यावसायिक वाहन “छोटा हाथी” प्रशासनिक लापरवाही के प्रतीक बन चुके हैं। चांपा से जांजगीर तक चलने वाले इन मिनी ट्रकों पर रोज़ाना लोहे के लंबे पाइप, सरिया और भारी धातु सामग्री बिना किसी सुरक्षा उपाय के लादी जा रही है। यह नजारा अब आम बात हो गई है — लेकिन खतरा असाधारण रूप से बड़ा है।

बिना संकेत, बिना नियम – सड़कों पर दौड़ रही ‘चलती दुर्घटनाएं’

इन वाहनों में सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा जाता। पाइप इस तरह लादे जाते हैं कि वे पीछे की ओर कई फुट तक बाहर निकले रहते हैं, पर न तो लाल झंडा लगाया जाता है और न ही रात में चेतावनी देने वाली रेड लाइट। ऐसे में दोपहिया वाहन चालक और राहगीर हर समय दुर्घटना के खतरे में रहते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर अचानक ब्रेक लगने या ओवरलोड होने से पाइप सड़क पर गिर जाते हैं, जिससे गंभीर हादसे टलते-टलते रह जाते हैं। कई बार पीछे से आने वाले बाइक सवार इन पाइपों से टकराते-टकराते बचते हैं। रात के समय स्थिति और भयावह हो जाती है, जब बिना किसी रिफ्लेक्टर या लाइट के ये वाहन अंधेरे में चलते हैं।

विभागों की अनदेखी से बढ़ा जोखिम

परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की उदासीनता ने हालात को और बिगाड़ दिया है। नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप, चालक और वाहन मालिक अब नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।

परिवहन नियमों के मुताबिक, लंबे सामान जैसे लोहे के पाइपों के परिवहन के दौरान वाहन की लंबाई से अधिक सामग्री बाहर नहीं होनी चाहिए, और यदि हो तो पीछे की ओर लाल झंडा या रात में रेड लाइट लगाना अनिवार्य है। परंतु यह नियम कागजों तक सीमित रह गया है।

अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग का अड्डा बना मार्ग

चांपा-जांजगीर मार्ग औद्योगिक और निर्माण सामग्री ढुलाई के लिए प्रमुख मार्ग है। हर दिन सैकड़ों छोटा हाथी वाहन इसी रास्ते से गुजरते हैं। इन वाहनों में अधिकांश या तो ओवरलोड हैं या फिर बिना वैध बीमा और लाइसेंस के चल रहे हैं। कई चालक न तो प्रशिक्षित हैं और न ही सुरक्षा मानकों से परिचित।

यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे वाहन न केवल खुद के लिए बल्कि पूरे मार्ग पर चलने वाले अन्य वाहनों के लिए भी “मोबाइल खतरा” हैं। यदि विभाग ने जल्द सख्त कार्रवाई नहीं की, तो कोई बड़ा हादसा होना तय है।

नागरिकों की मांग – तत्काल कार्रवाई और नियमित जांच

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जांजगीर-चांपा मार्ग पर नियमित परिवहन जांच अभियान चलाया जाए। असुरक्षित वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और ओवरलोड वाहनों को जब्त किया जाए।

इसके साथ ही, परिवहन विभाग को जागरूकता अभियान चलाकर वाहन चालकों को नियमों की जानकारी देनी चाहिए ताकि वे सुरक्षा उपायों का पालन करें।

अंतिम संदेश – सड़क सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी

यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक सुस्ती और चालक लापरवाही मिलकर आने वाले बड़े हादसे का संकेत दे रहे हैं। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो “छोटा हाथी” वाहन किसी भी पल मौत का दूत साबित हो सकते हैं।

सड़क सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक कर्तव्य भी है। हर नागरिक, चालक और अधिकारी को यह समझना होगा कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी सिर्फ जुर्म नहीं — बल्कि जान से खेलने जैसा अपराध है।

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