BHEL में हिस्सेदारी बिक्री शुरू: सरकार बेचेगी 5% तक स्टेक, ₹254 फ्लोर प्राइस तय

नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में अपनी 5% तक हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए की जा रही है। सरकार पहले 3% हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि 2% अतिरिक्त हिस्सेदारी ग्रीन शू ऑप्शन के तहत बेचने का विकल्प रखा गया है।
इस OFS के लिए ₹254 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव ₹276 से लगभग 8% कम है। ऑफर 11 फरवरी को खुल गया है और 12 फरवरी तक निवेशक इसमें भाग ले सकेंगे।
रिटेल निवेशकों के लिए बोली का समय
नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए यह ऑफर 11 फरवरी को खुला है।
रिटेल निवेशक 12 फरवरी को सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक बोली लगा सकेंगे।
सरकार इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए करीब ₹4,422 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रख रही है।
सरकार के पास अभी भी 63% से अधिक हिस्सेदारी
वर्तमान में BHEL में भारत सरकार की 63.17% हिस्सेदारी है। 5% हिस्सेदारी बेचने के बाद भी कंपनी में सरकार का नियंत्रण बना रहेगा। विनिवेश के तहत जुटाई गई राशि का उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा।
तीसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन
दिसंबर तिमाही में BHEL का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 206% बढ़कर ₹382 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी तिमाही में ₹125 करोड़ था।
कंपनी का रेवेन्यू भी 16% बढ़कर ₹8,473 करोड़ हो गया। बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन के चलते कंपनी के मुनाफे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ओडिशा प्रोजेक्ट के लिए ₹2,800 करोड़ का ऑर्डर
BHEL को भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड से करीब ₹2,800 करोड़ का लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस प्राप्त हुआ है। यह प्रोजेक्ट ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में ‘कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट’ प्लांट से संबंधित है। कंपनी इस परियोजना में डिजाइन, इंजीनियरिंग, सप्लाई और मेंटेनेंस का कार्य करेगी।
नॉलेज बॉक्स
- ऑफर फॉर सेल (OFS) क्या है?
OFS शेयर बाजार के माध्यम से हिस्सेदारी बेचने का एक तरीका है, जिसमें प्रमोटर अपने शेयर सीधे निवेशकों को ऑफर करते हैं। आमतौर पर इसमें बाजार मूल्य से थोड़ी छूट दी जाती है। - ग्रीन शू ऑप्शन क्या है?
यदि शेयरों की मांग अपेक्षा से अधिक होती है, तो प्रमोटर अतिरिक्त शेयर बेच सकते हैं। इसे ग्रीन शू ऑप्शन कहा जाता है। - फ्लोर प्राइस क्या है?
फ्लोर प्राइस वह न्यूनतम कीमत होती है, जिस पर शेयर बेचे जाएंगे। निवेशक इससे कम कीमत पर बोली नहीं लगा सकते।




