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निजी अस्पतालों में मानक सेवाएं सुनिश्चित करने स्वास्थ्य विभाग का औचक निरीक्षण, कई अनियमितताएं उजागर”

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जिला में स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स पर निगरानी कड़ी कर दी है। कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई निजी स्वास्थ्य संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में कई जगह रिकॉर्ड संधारण और दस्तावेजों में खामियां पाई गईं, जिस पर तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए हैं।

सक्ती जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मरीजों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देश पर डिप्टी कलेक्टर ओ.आई.सी. प्रीतेश सिंह राजपूत, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पूजा अग्रवाल और जिला नोडल अधिकारी (नर्सिंग होम एक्ट) डॉ. सुदर्शन भारद्वाज के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जैजैपुर विकासखंड के कई निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान टीम लाइफलाइन हॉस्पिटल परसदा हसौद और महामाया हॉस्पिटल हसौद पहुंची। यहां रोगी सेवा, स्वच्छता, प्रसूति सेवाओं की उपलब्धता, रिकार्ड संधारण, और नर्सिंग होम एक्ट के तहत आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई।

जांच में पाया गया कि कुछ निजी संस्थानों में आवश्यक दस्तावेजों की कमी, रजिस्टर संधारण में लापरवाही, और सूचना प्रदर्शन में स्पष्टता की कमी है। टीम ने इन संस्थानों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए और कहा कि सभी रिकॉर्ड एवं व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी की जाएं।

अधिकारियों ने सभी अस्पतालों को निर्देशित किया कि वे मरीजों के लिए दर सूची और अधिकार संबंधी जानकारी का स्पष्ट प्रदर्शन करें, साथ ही प्रसूति और आपात सेवाओं की वास्तविक उपलब्धता, स्वच्छ प्रतीक्षा कक्ष, बैठने की समुचित व्यवस्था, और नियमित चिकित्सा अभिलेख अद्यतन सुनिश्चित करें।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पूजा अग्रवाल ने कहा कि –

“स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सभी निजी अस्पताल तय मानकों के अनुरूप सेवा दें। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। यह अभियान जिले में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जवाबदेही तय करने और मरीजों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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