हाथी गांव में, सिस्टम नींद में! मातिन में तबाही, वन विभाग बेखबर

लॉकेशन कोरबा
रिपोर्टर सरोज रात्रै
जिले के ऐतमा रेंज से इस वक्त एक बड़ी और डराने वाली तस्वीर सामने आ रही है…
जहां जंगली हाथी खुलेआम गांवों में आतंक मचा रहे हैं…
लेकिन जिम्मेदार वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
मातिन गांव में हाथियों ने न सिर्फ फसलें रौंदी हैं, बल्कि गरीब का आशियाना भी तोड़ दिया है।
सबसे बड़ा सवाल — जब हाथी गांव में घुस रहे थे, तब वन विभाग कहां था?
देखिए हमारी खास रिपोर्ट…”
“ऐतमा रेंज का मातिन गांव…
जहां इन दिनों डर के साये में जीने को मजबूर हैं ग्रामीण।
पिछले कई दिनों से दो से तीन जंगली हाथी लगातार इलाके में तबाही मचा रहे हैं।
राहर और धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं…
और अब हाथियों का निशाना बन रहे हैं गरीबों के कच्चे मकान।
बीती रात हाथियों ने मातिन गांव निवासी संत लाल रजवाड़े के घर पर हमला कर दिया।
कच्चा मकान ढह गया…
घर में रखा धान हाथियों ने रौंद डाला।
यह वही धान था, जो पूरे साल के परिवार के लिए सहारा था।”


“रात भर डर के मारे जागते रहे…
हाथी घर तोड़ रहा था, कोई मदद नहीं आई…
वन विभाग को कई बार सूचना दी, लेकिन कोई नहीं पहुंचा…”
“ग्रामीणों के आरोप बेहद गंभीर हैं।
उनका कहना है कि हाथी मित्र दल गांवों के आसपास तो तैनात रहते हैं…
लेकिन ड्यूटी के वक्त सोते रहते हैं।
न निगरानी, न अलर्ट और न ही हाथियों को समय रहते जंगल की ओर खदेड़ने की कोई कोशिश।
नतीजा ये है कि ग्रामीण जान जोखिम में डालकर
खुद ही हाथियों को भगाने की कोशिश कर रहे हैं —
जो कभी भी बड़े हादसे में बदल सकता है।”
“आप इस जगह को देख सकते हैं…
यही वो मकान है जिसे हाथियों ने तोड़ा।
सवाल सीधा है —
अगर इसी तरह हाथी गांव में घुसते रहे और वन विभाग की मौजूदगी नहीं रही,
तो किसी की जान गई तो जिम्मेदारी किसकी होगी?”
“मातिन गांव में हालात साफ हैं…
हाथी जाग रहे हैं, ग्रामीण जाग रहे हैं…
लेकिन जिम्मेदार सिस्टम सोता नजर आ रहा है।
अब सवाल ये है —
क्या वन विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा,
या फिर समय रहते ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?”




