बलरामपुर

मकर संक्रांति पर तातापानी महोत्सव बना आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का महाकुंभ

बलरामपुर, छत्तीसगढ़
संवाददाता :- दयाशंकर यादव

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बलरामपुर जिले के प्रसिद्ध तातापानी धाम में आयोजित तातापानी महोत्सव 2026 आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का भव्य संगम बनकर उभरा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तातापानी पहुंचकर तपेश्वर महादेव के दर्शन किए और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
इसी महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में 200 नवयुगल जोड़े सामूहिक विवाह के माध्यम से परिणय सूत्र में बंधे, जो सामाजिक एकता की एक मिसाल बना।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंदिर प्रांगण में विधिवत शिवलिंग पर जल अर्पित किया और दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।
उत्सव के उल्लासपूर्ण माहौल में मुख्यमंत्री बच्चों के बीच नजर आए।
उन्होंने छात्रों के साथ चकरी और मांझा थामकर पतंगबाजी का आनंद लिया।
मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद करते हुए पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पारंपरिक चारपाई पर बैठकर साल पत्ती के दोने में गजक, तिलकुट और तिल के लड्डू का स्वाद लिया।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति हमारी सांस्कृतिक परंपराओं, आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक पर्व है, जो समाज को जोड़ने का कार्य करता है।

तातापानी महोत्सव के दौरान सामाजिक समरसता की एक अनूठी तस्वीर भी देखने को मिली।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में 200 नवयुगल जोड़े सामूहिक विवाह योजना के तहत परिणय सूत्र में बंधे।
इनमें 195 हिंदू और 5 क्रिश्चियन जोड़ों का विवाह उनके-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया गया।
जहां हिंदू जोड़ों ने मंत्रोच्चार और सात फेरों के साथ विवाह किया, वहीं क्रिश्चियन समुदाय के जोड़ों ने पादरी की उपस्थिति में जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।
सामूहिक विवाह योजना ने जरूरतमंद, गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ा संबल प्रदान किया है।

तातापानी महोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह आयोजन केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित नहीं है,
बल्कि यह सामाजिक एकता, भाईचारे और मानवीय मूल्यों का जीवंत प्रतीक बन चुका है।

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