सक्ती

मनरेगा से संवरी बिनौधा की तक़दीर: बँधवा टार तालाब बना जल-सुरक्षा, सिंचाई और रोजगार का मजबूत आधार

रिपोर्टर: दीपक यादव
सक्ती | 18 दिसंबर 2025

कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ श्री वासु जैन के मार्गदर्शन में सक्ती जिले के डभरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बिनौधा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कराए गए बँधवा टार तालाब के गहरीकरण एवं पचरी निर्माण कार्य ने गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। वर्षों से जल संकट से जूझ रहा यह गांव अब जल-सुरक्षा, सिंचाई सुविधा और रोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता नजर आ रहा है।

ग्राम बिनौधा से लगभग 300 मीटर पूर्व दिशा में स्थित बँधवा टार तालाब कभी गांव की जीवनरेखा हुआ करता था, लेकिन लंबे समय तक गाद भर जाने से इसकी जलधारण क्षमता अत्यंत कम हो गई थी। बरसात का पानी कुछ ही दिनों में बह जाता था और गर्मी के मौसम में तालाब पूरी तरह सूख जाता था। इसके चलते किसान खेती के लिए पूरी तरह मानसून पर निर्भर थे। गांव के कुएं और हैंडपंप सूखने लगे थे, वहीं महिलाओं और बुजुर्गों को दूर-दराज़ से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ता था।

जल संकट की गंभीरता को देखते हुए ग्राम सभा में सर्वसम्मति से तालाब गहरीकरण को प्राथमिकता दी गई। सरपंच, सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक के समन्वय से मनरेगा अंतर्गत बँधवा टार तालाब के गहरीकरण एवं पचरी निर्माण कार्य को स्वीकृति मिली। कार्य प्रारंभ होते ही मास्टर रोल जारी कर स्थानीय ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया गया।

इस कार्य में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। कुल 4055 मानव-दिवस का सृजन हुआ, जिससे अनेक ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका का सहारा मिला और बाहरी क्षेत्रों में पलायन पर प्रभावी रोक लगी। कार्य को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ समयबद्ध रूप से पूर्ण किया गया।

तालाब के गहरीकरण से वर्षा जल संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब बरसात का पानी लंबे समय तक तालाब में संचित रहता है, जिससे आसपास के खेतों में नमी बनी रहती है और सिंचाई सुविधा बेहतर हुई है। इसका सीधा लाभ किसानों को मिला है—सब्ज़ी उत्पादन बढ़ा है और आय में भी इज़ाफा हुआ है। भू-जल स्तर बढ़ने से गांव के कुएं और हैंडपंप पुनः चालू हो गए हैं। पशुपालकों को भी वर्षभर पानी की सुविधा उपलब्ध हो रही है।

आज बँधवा टार तालाब केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि ग्राम बिनौधा के लिए ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। यह पहल इस बात का सशक्त उदाहरण है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन, प्रशासनिक मार्गदर्शन और जनभागीदारी मिलकर ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल सकते हैं।

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