इस साल के पहले लोक पर्व छेरछेरा की धूम, घर-घर गूंजे लोकगीत

भारत लोक पर्वों और लोक आस्थाओं की भूमि है, जहाँ हर त्योहार अपने भीतर सामाजिक संदेश और परंपरा समेटे होता है। ऐसा ही एक अनोखा लोक पर्व है छेरछेरा, जिसे छत्तीसगढ़ में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
जब खेतों में लहलहाती फसल धान बनकर घरों तक पहुँचती है, तो किसान अपनी खुशी को समाज के साथ बाँटने के लिए छेरछेरा पर्व मनाते हैं। यह पर्व दान, सहयोग और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है।
इस वर्ष भी छेरछेरा की परंपरा पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है।


कोरबा जिले में सुबह से ही बच्चों की टोलियाँ हाथों में थाली लेकर “छेरछेरा… माई कोठी के धान” की गूंज के साथ घर-घर पहुँच रही हैं।
वहीं लोग भी प्रसन्न मन से बच्चों को चावल, अनाज और नगद राशि देकर इस लोक पर्व की खुशियों में शामिल हो रहे हैं। छेरछेरा ने एक बार फिर शहर और गाँवों में लोक संस्कृति की रौनक लौटा दी है।




