क्राइम

24 साल की उम्र में यूपी को दहला देने वाला गैंगस्टर: CM की सुपारी लेने वाला वो डॉन, जिसके नाम से पुलिस तक कांपती थी

उत्तर प्रदेश ने कई बाहुबली और अपराधियों को देखा है, लेकिन 90 के दशक में जो दहशत श्रीप्रकाश शुक्ला ने पैदा की, वैसा खौफ यूपी ने न उससे पहले देखा था और न बाद में। केवल 24 साल की उम्र में मोस्ट वांटेड—इतना खतरनाक दर्जा उस दौर में किसी अपराधी को नहीं मिला था।

गोरखपुर से निकलने वाला यह नाम कुछ ही वर्षों में उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक अपराध जगत का सबसे डरावना चेहरा बन चुका था।

कौन था श्रीप्रकाश शुक्ला? — कॉलेज से अपराध की दुनिया तक

श्रीप्रकाश शुक्ला का शुरुआती जीवन सामान्य था, लेकिन 90 के दशक में कॉलेज विवादों से शुरू हुआ उसका सफर जल्द ही सुपारी किलिंग, अपहरण और राजनीतिक टार्गेट्स तक पहुँच गया। वह तेजी से एक ऐसे नेटवर्क का बॉस बन गया जहाँ—

कानून का कोई डर नहीं

पुलिस जाने से कतराती

और राजनेता तक उसके नाम से चौकन्ने रहते

कुछ ही समय में वह पूर्वी यूपी का सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट किलर बन चुका था।

जब यूपी के CM की हत्या की सुपारी ले ली—यहीं से बदला खेल

कहा जाता है कि 1997-98 के करीब श्रीप्रकाश शुक्ला ने उस समय के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी स्वीकार कर ली थी।
यह जानकारी जैसे ही टॉप लेवल तक पहुँची, यूपी के इतिहास का सबसे बड़ा कदम उठाया गया—

यूपी STF का जन्म हुआ।

पूरे राज्य में पहली बार किसी एक अपराधी को खत्म करने के लिए
स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया गया।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शुक्ला का अपराध जगत और सत्ता गलियारों पर कितना बड़ा असर था।

पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द—“श्रीप्रकाश बाहर है” सुनते ही रेड अलर्ट

उस दौर के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मानते हैं कि—

शुक्ला के खिलाफ ऑपरेशन शुरू करना मौत को बुलाना था

इनकाउंटर टीम को हर कदम पर स्पेशल प्रोटेक्शन मिलती थी

किसी इलाके में उसके मौजूद होने की खबर भर से पुलिस लाइन में अफरा-तफरी मच जाती थी

बिहार तक फैला उसका नेटवर्क इतना मजबूत था कि उसके साथी हथियार, सुपारी और पैसों का पूरा साम्राज्य चलाते थे।

देश का पहला बड़े पैमाने का संगठित इनकाउंटर अभियान

CM की सुपारी की जानकारी सामने आने के बाद STF ने महीनों तक उसकी लोकेशन ट्रैक की।
लगातार मूवमेंट बदलने वाले, हाई-टेक फोन इस्तेमाल करने वाले इस गैंगस्टर तक पहुँचना आसान नहीं था।

आखिरकार 1998 में दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर एक बड़े ऑपरेशन में STF ने श्रीप्रकाश शुक्ला को ढेर कर दिया।

यह ऑपरेशन इतना हाई-प्रोफाइल था कि इसे भारत में मॉडर्न पुलिसिंग और इंटेलिजेंस ऑपरेशन का नया मोड़ माना गया।

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