राज्यसभा में गूंजा गिग वर्कर्स का मुद्दा: राघव चड्ढा ने कहा—“डिलीवरी बॉयज़ की ज़िंदगी समय से ज़्यादा कीमती

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने देशभर में काम कर रहे लाखों गिग वर्कर्स की सुरक्षा और उनके कठिन कार्य परिस्थितियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तेज़ी से बढ़ती ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों के 10 मिनट डिलीवरी मॉडल ने डिलीवरी पार्टनर्स की जान को जोखिम में डाल दिया है।
चड्ढा का सवाल: “कितने डिलीवरी बॉयज़ की जान की कीमत पर चल रहा है ये मॉडल?”
सांसद राघव चड्ढा ने सदन में कहा कि कंपनियों द्वारा निर्धारित समय सीमा के दबाव में डिलीवरी बॉयज़ ट्रैफिक नियमों को तोड़ने को मजबूर होते हैं, जिससे सड़क हादसों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार शीघ्र कदम नहीं उठाती तो यह स्थिति और खतरनाक होती जाएगी।
10 मिनट डिलीवरी मॉडल को तुरंत रोके जाने की मांग
चड्ढा ने कहा कि यह मॉडल न केवल अव्यवहारिक है बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अनुचित है।
उनके अनुसार—
डिलीवरी पार्टनर्स समय सीमा पूरी करने के दबाव में लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं
सुरक्षा उपकरण, बीमा और मेडिकल कवरेज पर्याप्त नहीं
कंपनियाँ मुनाफे की दौड़ में श्रमिकों की सुरक्षा को नज़रअंदाज़ कर रही हैं
इसी वजह से उन्होंने सरकार से इस मॉडल को तुरंत बंद करने की मांग की।
गिग वर्कर्स के लिए सुरक्षा नियम तय करने की अपील
राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों युवाओं की आजीविका गिग सेक्टर पर टिकी है, ऐसे में सरकार का दायित्व है कि उनके लिए—
बेहतर कार्यस्थल सुरक्षा मानक
दुर्घटना बीमा
स्वास्थ्य सुविधाएँ
न्यूनतम वेतन जैसी सुरक्षा प्रदान करे
उन्होंने यह भी कहा कि गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा कानूनों के दायरे में जल्द से जल्द लाया जाना चाहिए।
सरकार पर दबाव बढ़ा
राज्यसभा में उठे इस मुद्दे ने गिग इकॉनमी में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष का कहना है कि यदि सरकार डिजिटल और स्टार्टअप सेक्टर को प्रोत्साहित कर रही है, तो इसे मानव जीवन की कीमत पर नहीं बढ़ाया जा सकता।




