वनांचल के सुदूर टोलों में जलेगा उजाले का दीप: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से 3 करोड़ से अधिक की विद्युतीकरण स्वीकृति

संवाददाता: सुरेन्द्र साहू | सूरजपुर
जंगलों के बीच बसे वे मजरा-टोले, जिन्होंने वर्षों से अंधेरे को ही अपना भाग्य मान लिया था, अब विकास की रोशनी से जगमगाने वाले हैं। सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड अंतर्गत सुदूर वनांचल क्षेत्रों में पहली बार नियमित बिजली पहुंचाने के लिए 3 करोड़ 6 लाख 92 हजार 670 रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की गई है। यह ऐतिहासिक पहल लक्ष्मी राजवाड़े, महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक, के विशेष प्रयासों से साकार हो पाई है।
भटगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मसंकी, बांक और असुरा के कई मजरा-टोले अब तक मुख्य विद्युत लाइन से पूरी तरह वंचित थे। सूर्यास्त के बाद इन गांवों में घना अंधेरा छा जाता था और ग्रामीण ढिबरी या सीमित सोलर लाइट के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर थे। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, किसानों के कृषि कार्य और दैनिक जनजीवन पर पड़ रहा था।
क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने ऊर्जा विभाग और राज्य स्तर पर लगातार पहल की। परिणामस्वरूप ‘मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना’ के अंतर्गत इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
स्वीकृत राशि से ग्राम मसंकी के लुकभुकिया और पतेरीपारा, ग्राम बांक के खासपारा और स्कूलपारा, तथा ग्राम असुरा के खासपारा, पण्डोपारा और असुरा-1 में विद्युत विस्तार कार्य किया जाएगा। करोड़ों रुपये की लागत से होने वाला यह कार्य केवल घरों तक बिजली पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और स्वरोजगार के नए द्वार खोलेगा।
इस परियोजना में सबसे बड़ी चुनौती वन भूमि की अनुमति थी, क्योंकि संबंधित टोले घने जंगलों के भीतर स्थित हैं। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की सक्रिय पहल से विभागीय स्तर पर आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) प्राप्त कर लिया गया है। अब जल्द ही जमीनी स्तर पर कार्य प्रारंभ होने की तैयारी है।
मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक अंधेरे में न रहे। उन्होंने विश्वास जताया कि बिजली पहुंचने से बच्चों को बेहतर शिक्षा का वातावरण मिलेगा, किसानों को कृषि कार्यों में सुविधा होगी और स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार एवं लघु उद्योगों के अवसर प्राप्त होंगे। यह योजना वनांचल क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी।
यह स्वीकृति न सिर्फ बिजली की उपलब्धता का रास्ता खोलेगी, बल्कि दशकों से उपेक्षित वनांचल गांवों के जीवन में स्थायी बदलाव की शुरुआत भी मानी जा रही है।




