जांजगीर-चांपा

आस्था की राह बदहाल, व्यवस्था बेखबर — राजनीति की भेंट चढ़ा मां मड़वारानी मंदिर

रिपोर्टर:- सरोज रात्रे
लोकेशन:- मड़वारानी, जांजगीर-चांपा

जांजगीर-चांपा जिले में स्थित मां मड़वारानी मंदिर…
जहां श्रद्धालु आस्था लेकर पहुंचते हैं,
आज वही आस्था बदहाल रास्तों और लचर व्यवस्था की शिकार बनती नजर आ रही है।
मंदिर तक जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है।
उखड़ी हुई सीसी रोड, जगह-जगह गहरे गड्ढे और बाहर निकली नुकीली गिट्टियां
दर्शनार्थियों के लिए हर कदम पर खतरा बन चुकी हैं।
चढ़ाई वाले इस पहाड़ी रास्ते पर वाहन बार-बार अनियंत्रित हो रहे हैं,
जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
दर्शनार्थियों का सीधा आरोप है कि
मां मड़वारानी मंदिर अब आस्था का नहीं,
बल्कि राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है।
कांग्रेस और भाजपा से जुड़े लोगों के कथित हस्तक्षेप के चलते
न विकास हो पा रहा है,
न ही मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल मंदिर प्रबंधन को लेकर है।
वर्षों पहले ट्रस्ट गठन के लिए सर्वे तक कराया गया,
लेकिन आज तक ट्रस्ट का गठन नहीं हो सका।
फाइलें दफ्तरों में धूल खा रही हैं —
और आस्था सड़क पर जवाब मांग रही है।
श्रद्धालुओं का यह भी कहना है कि
मंदिर में प्रतिदिन सोना, चांदी और नगद दान बड़ी मात्रा में आता है,
तो फिर मंदिर मार्ग और सुविधाओं की यह दुर्दशा क्यों?
हाल ही में दर्शन के लिए जा रहे एक परिवार का ऑटो
रास्ते में अचानक आग की चपेट में आ गया।
गनीमत रही कि जान बच गई,
लेकिन अगर कोई बड़ा हादसा हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा?
रात के समय हालात और भी भयावह हो जाते हैं।
अधिकांश स्ट्रीट लाइटें या तो खराब हैं
या कुछ देर जलकर बंद हो जाती हैं,
जिससे अंधेरे में पहाड़ी रास्ते पर आवाजाही जानलेवा साबित हो सकती है।
हैरानी की बात यह है कि
इसी रास्ते से मंदिर समिति के सदस्य,
नेता-मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी
नियमित रूप से दर्शन के लिए आते-जाते हैं,
फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
अब सवाल साफ है—
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
या फिर मां मड़वारानी की आस्था
यूँ ही राजनीति और लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी?
दर्शनार्थियों की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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