“जहां से देश चले वह जगह प्रेरणादायी होनी चाहिए” – सेवा तीर्थ उद्घाटन पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली | Feb 13, 2026
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन 1-2’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जिस स्थान से देश का संचालन होता है, वह जगह प्रभावी और प्रेरणादायी होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बताते हुए कहा कि 13 फरवरी का दिन विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
ब्रिटिश सोच से सेवा भाव तक
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य की प्रशासनिक सोच को लागू करने के उद्देश्य से बनाई गई थीं। उन्होंने कहा कि अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे आधुनिक परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं। यहां से लिए जाने वाले निर्णय 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए नॉर्थ और साउथ ब्लॉक की इमारतों को संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि देश की प्रशासनिक विरासत को संरक्षित रखा जा सके।
पुराने भवनों में जगह और सुविधाओं की कमी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लगभग 100 वर्ष पुराने भवनों में जगह और आधुनिक सुविधाओं की भारी कमी थी। उन्होंने बताया कि आजादी के दशकों बाद भी केंद्र सरकार के कई मंत्रालय दिल्ली के 50 से अधिक अलग-अलग स्थानों से संचालित हो रहे थे। इन कार्यालयों के किराए पर हर वर्ष 1500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहे थे।
इसके अलावा, रोजाना 8 से 10 हजार कर्मचारियों को एक इमारत से दूसरी इमारत तक आने-जाने में समय और संसाधन खर्च होते थे। सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों के निर्माण से इन व्यवस्थागत समस्याओं का समाधान होगा, खर्च में कमी आएगी और कार्यक्षमता बढ़ेगी।
विकसित भारत की सोच को दर्शाता नया परिसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है और अब विकसित भारत की कल्पना केवल नीतियों में नहीं, बल्कि कार्यस्थलों और प्रशासनिक ढांचे में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां से देश चलता है, वह स्थान केवल ऊंचाई का प्रतीक न होकर जनता से जुड़ा हुआ होना चाहिए। सेवा तीर्थ को इसी सोच के साथ जमीन से जुड़ा हुआ बनाया गया है।
गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करना आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय स्मारकों और स्थानों के नाम बदलने के निर्णयों को इसी अभियान का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन की सोच को ‘राज’ से ‘सेवा’ की भावना में बदलने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि पहले जिसे राजपथ कहा जाता था, उसे कर्तव्य पथ के रूप में विकसित किया गया है। अब यह स्थान आम नागरिकों, परिवारों और बच्चों के लिए एक जीवंत सार्वजनिक स्थल बन चुका है।
जनता को समर्पित सेवा तीर्थ
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन को देश की जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह परिसर भारत के वर्तमान, अतीत और भविष्य को गौरव से जोड़ने का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नया प्रशासनिक ढांचा विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




