“राज्यों के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश, संघीय संतुलन बनाए रखना जरूरी”

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए संघीय ढांचे की मजबूती पर जोर दिया है। अदालत ने कहा कि संविधान के तहत राज्यों को प्रदत्त अधिकारों को किसी भी स्थिति में कमजोर या सीमित नहीं किया जा सकता।
एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की अवधारणा पर आधारित है, जहां केंद्र और राज्य दोनों की भूमिकाएं स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं।
कोर्ट ने कहा कि किसी भी नीति, कानून या प्रशासनिक निर्णय में राज्यों की स्वायत्तता और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि केंद्र और राज्य के बीच संतुलन बिगड़ता है, तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक व्यवस्था और शासन प्रणाली पर पड़ता है।
अदालत के अनुसार, संविधान की मूल भावना तभी सुरक्षित रह सकती है जब संघीय संतुलन बनाए रखा जाए।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आने वाले समय में
केंद्र द्वारा बनाए जाने वाले कानूनों,
राज्यों के अधिकार क्षेत्र,
और संघीय विवादों से जुड़े मामलों में
एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकती है।

इस टिप्पणी को ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है, जब देश में केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों को लेकर बहस तेज होती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से राज्यों की संवैधानिक स्थिति को नैतिक और कानूनी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।




