
लोकेशन-सूरजपुर (छत्तीसगढ़)/रिपोर्टर-सुरेन्द्र साहू
देश अमृत काल का जश्न मना रहा है… विकास के दावे किए जा रहे हैं… हर घर जल की बात हो रही है…
लेकिन सूरजपुर से आई ये तस्वीर… उन तमाम दावों पर सीधा सवाल खड़ा करती है…
क्या यही है अमृत काल…?


जहां इंसान और जानवर एक ही गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं…?
जिम्मेदारों से सवाल है… आखिर कब तक ये ग्रामीण यूं ही बदहाली में जीते रहेंगे…?
देखिए ये ग्राउंड रिपोर्ट…
वीओ-1 (इमोशनल + स्ट्रॉन्ग)
ये तस्वीरें किसी पिछड़े दौर की नहीं… बल्कि आज के भारत की हैं…
जहां सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड के केवटाली पंचायत के जुडहा पारा और बरपारा में लोग आज भी गड्ढे… यानी ढोढी का पानी पीने को मजबूर हैं…
ये वही पानी है… जहां जानवर भी आते हैं… गंदगी भी है… लेकिन यही इनकी जिंदगी है…
10 से 15 साल गुजर गए… लेकिन गांव तक साफ पानी नहीं पहुंचा…
हर दिन… हर रात… डेढ़ किलोमीटर का सफर… सिर्फ पानी के लिए…



इस पानी की कीमत सिर्फ प्यास नहीं… बल्कि बीमारियों के रूप में भी चुकानी पड़ रही है…
बच्चे बीमार पड़ रहे हैं… अस्पताल के चक्कर लग रहे हैं…
और गरीब ग्रामीण अपनी कमाई इलाज में खर्च करने को मजबूर हैं…
जंगल के पास बनी इस ढोढी तक पहुंचना भी खतरे से खाली नहीं…
हर वक्त जंगली जानवरों का डर… लेकिन मजबूरी इतनी बड़ी है कि जान जोखिम में डालनी पड़ रही है…
और जिम्मेदार…?
वो एसी कमरों में बैठकर योजनाओं के कागजों में विकास ढूंढ रहे हैं…
मामला सामने आने के बाद अब स्थानीय जनप्रतिनिधि भी खुलकर सामने आ गए हैं…
उन्होंने सीधे तौर पर सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजनाओं के लिए फंड ही सही तरीके से नहीं मिला…
अब आंदोलन की चेतावनी दी जा रही है…
लेकिन सवाल ये है…
क्या हर बार आवाज उठाने के बाद ही सिस्टम जागेगा…?
अमृत काल… विकास… हर घर जल…
ये सिर्फ नारे हैं… या जमीन पर भी कुछ हकीकत है…?
सूरजपुर की ये तस्वीर… सिस्टम के मुंह पर एक करारा तमाचा है…
अब देखना ये होगा…
कि खबर चलने के बाद जिम्मेदार जागते हैं…
या फिर ये ग्रामीण… यूं ही गड्ढे का पानी पीकर अपनी जिंदगी काटने को मजबूर रहेंगे…




