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मध्य प्रदेश में बाघ और तेंदुए की मौतें बढ़ीं, इस साल अब तक संख्या पहुंची 53

स्थान: मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों और अधिकारियों के लिए चिंता की खबर है। राज्य में इस वर्ष तेंदुए और बाघों की मौतों की संख्या 53 तक पहुँच गई है। इसमें से पिछले 72 घंटों में 5 नई मौतें दर्ज की गई हैं।

वन विभाग ने मौके पर तुरंत जांच शुरू कर दी है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में यह संकेत नहीं मिले कि मौतें शिकारियों की गतिविधियों के कारण हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है, जिसमें प्राकृतिक कारण, बीमारियां और मानवीय गतिविधियों के प्रभाव को भी शामिल किया जा रहा है।

सुरक्षा और निगरानी

वन विभाग ने क्षेत्रीय अधिकारियों को जानवरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के कड़े निर्देश दिए हैं। साथ ही, निगरानी और ट्रैकिंग टीमों को सक्रिय कर तेंदुए और बाघों के आवास क्षेत्रों में सतर्क रहने का आदेश दिया गया है।

संरक्षण कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के संरक्षण कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से बेहतर निगरानी और सुरक्षा उपायों की मांग की है। उनका कहना है कि वन्यजीवों की मौतों में लगातार बढ़ोतरी वन्य जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा है।

वन्यजीव विभाग आगामी हफ्तों में स्पेशल टीम बनाकर कारणों की विस्तृत जांच करेगा और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों और जंगलों में सुरक्षा उपायों को और कड़ा करेगा।

“मध्य प्रदेश के जंगलों में वन्यजीव प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। इस साल अब तक राज्य में बाघ और तेंदुए की मौतों की संख्या 53 तक पहुंच गई है। वन विभाग और संरक्षण कार्यकर्ता मिलकर स्थिति की निगरानी और सुरक्षा उपायों को कड़ा कर रहे हैं

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