विधायक शकुंतला पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र विवाद पर आदिवासी समाज का उबाल—सुनवाई अब 29 दिसंबर को, प्रशासन हाई अलर्ट पर

स्थान: बलरामपुर
संवाददाता: दयाशंकर यादव
प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र को लेकर आदिवासी समाज में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को समुदाय के लोगों ने बलरामपुर में विशाल रैली निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया और विधायक का जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने की मांग दोहराई।
सुनवाई टली—29 दिसंबर नई तारीख
आज जिला कलेक्टर के न्यायालय में इस मामले की सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन प्रशासन ने इसे 29 दिसंबर के लिए स्थगित कर दिया।
पिछली सुनवाई के दौरान हुई अप्रिय घटना और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए इस बार कलेक्टर परिसर के 500 मीटर क्षेत्र में धारा 144 लागू की गई थी। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा, लेकिन सुनवाई टलने के बाद प्रदर्शन और तीव्र हो गया।


रैली, नारेबाजी और आक्रोश
सुनवाई बढ़ाए जाने के बाद नाराज आदिवासी समाज सड़क पर उतर आया।
रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए
“फर्जी जाति प्रमाण पत्र रद्द करो” जैसे नारे गूंजे
समाज ने आरोप लगाया कि मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है
रैली जैसे ही मुख्यालय के अटल चौक के पास पहुंची, प्रशासन ने उसे रोक दिया। इसके बाद पुलिस और समाज के लोगों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। हालांकि, स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए पुलिस ने किसी तरह भीड़ को शांत किया।
क्या है विवाद?
विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठाते हुए आदिवासी समाज का आरोप है कि प्रमाण पत्र गलत तरीके से बनवाया गया है। इसी मामले पर जिला कलेक्टर के न्यायालय में सुनवाई चल रही है।
29 दिसंबर की सुनवाई अब इस मामले का अगला अहम पड़ाव होगी। आदिवासी समाज ने साफ कर दिया है कि जब तक जाति प्रमाण पत्र निरस्त नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
बलरामपुर में सुरक्षा बढ़ाई गई है और प्रशासन हालात पर कड़ी नजर रखे हुए है।




