जांजगीर-चांपा

फिल्म देखने आईं दो _दो युवतियों का महायुद्ध — दर्शक वीडियो बनाते रहे, किसी ने नहीं कराया बीच-बचाव

रिपोर्टर — जय ठाकुर के साथ मयंक

लोकेशन — जांजगीर-चांपा

दिनांक — 06/12/2025

चांपा से इस वक्त की बड़ी खबर… मुकुंद टॉकीज के बाहर दो – दो युवतियों के बीच जबरदस्त मारपीट का वीडियो सामने आया है। सिनेमा हॉल के बाहर अचानक शुरू हुआ विवाद कुछ ही सेकेंड में ऐसा रूप ले लिया कि देखने वालों की भीड़ लग गई… लोग तमाशा देखते रहे… वीडियो बनाते रहे… लेकिन किसी ने बीच-बचाव करना जरूरी नहीं समझा।

चांपा के प्रसिद्ध मुकुंद टॉकीज में शुक्रवार शाम यूं तो भीड़ सामान्य दिनों की तरह फिल्मों का आनंद लेने पहुंची थी… लेकिन अचानक माहौल तब बदल गया जब दो – दो युवतियाँ आपस में भिड़ गईं।

देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक-दूसरे पर थप्पड़ों, मुक्कों और बाल खींचकर हमला कर दिया।

टॉकीज के बाहर मौजूद लोग चौंक गए… लेकिन कुछ ही देर में यह पूरा मामला “हंगामा” बन गया।

लोग मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने में जुट गए… और तमाशा देखते हुए आनंद लेते रहे।

सूत्रों के अनुसार मामला आपसी विवाद का बताया जा रहा है। जानकारी यह भी मिली है कि दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे को पहले से जानती थीं और मुलाकात के दौरान किसी बात को लेकर बहस शुरू हुई, जो धीरे-धीरे मारपीट में बदल गई।

हैरानी की बात यह रही कि आसपास मौजूद स्टाफ या दर्शकों ने रोकने की कोशिश नहीं की…

भीड़ सिर्फ तमाशा देखकर खुश होती रही और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालते रही।

मुकुंद टॉकीज के बाहर हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या लोगों की संवेदनशीलता खत्म हो चुकी है?

मारपीट रोकने की बजाय तमाशा देखने की मानसिकता क्यों बढ़ती जा रही है?

और सबसे अहम—ऐसी घटनाएँ सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा और अनुशासन पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।

घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस भी हरकत में आ गई है।

चांपा थाना पुलिस ने कहा है कि वीडियो की जांच की जा रही है और युवतियों की पहचान भी की जा रही है।

फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन वायरल वीडियो के आधार पर कानूनी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

मुकुंद टॉकीज में दो -दो लड़कियों के बीच हुए इस विवाद ने शहर में चर्चा का माहौल बना दिया है। सवाल यह नहीं कि कौन सही था और कौन गलत…

सवाल यह है कि सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाए और भीड़ तमाशबीन बनने के बजाय जिम्मेदारी कैसे निभाए।

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