UNESCO ने 15 दिसंबर को ‘वर्ल्ड टर्किक भाषा परिवार दिवस’ घोषित किया, तुर्क भाषाई विरासत और सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर मान्यता मिली

15 दिसंबर को UNESCO (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) ने पहली बार ‘World Turkic Language Family Day’ यानी वर्ल्ड टर्किक भाषा परिवार दिवस के रूप में घोषित किया है। यह निर्णय UNESCO की 43वीं सामान्य सभा में समरकंद, उज्बेकिस्तान में लिया गया, जहाँ 194 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इस घोषणा का उद्देश्य तुर्क भाषाओं और उनके इतिहास, संस्कृति तथा साझा विरासत को सम्मान देना और सभी देशों में भाषाई विविधता को प्रोत्साहित करना है।
यह दिवस हर साल 15 दिसंबर को मनाया जाएगा। यह तिथि विशेष इसलिए चुनी गई है क्योंकि 15 दिसंबर 1893 को डेनिश भाषावैज्ञानिक विल्हेम थॉमसन ने ओर्खोन शिलालेखों (Orkhon Inscriptions) का सफलतापूर्वक समाधान किया था — ये शिलालेख तुर्क भाषाई परिवार के सबसे प्राचीन लिखित साक्ष्यों में से एक हैं। यह ऐतिहासिक उपलब्धि तुर्क भाषाओं के सांस्कृतिक गहराई और उनकी ऐतिहासिक जड़ों को उजागर करती है।
तुर्क भाषाएँ — जैसे अज़रबैजानी, कज़ाख, किरगिज़, तुर्की, तुर्मेन, उज़बेक — आज 200 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती हैं और लगभग 12 मिलियन वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई हैं। ये भाषाएँ केवल संवाद का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सदियों पुरानी साहित्यिक परंपराएँ, मौखिक संस्कृति और सामूहिक पहचान को प्रतिबिंबित करती हैं।
इस पहल को तुर्किक देशों — अज़रबेज़ान, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, तुर्की और उज़्बेकिस्तान — ने संयुक्त रूप से प्रस्तावित किया था और 26 देशों ने इसका समर्थन किया। UNESCO के इस निर्णय के माध्यम से वैश्विक स्तर पर बहुभाषावाद, सांस्कृतिक समावेशिता और अंतरसांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया है।
महत्व:
- तुर्क भाषाओं की साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मान्यता।
- भाषाई विविधता और बहुभाषावाद को UNESCO के प्राथमिक लक्ष्यों में शामिल करना।
- शैक्षणिक शोध, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भाषाई संरक्षण पहलों के लिए एक वैश्विक मंच का निर्माण।
इस नए दिवस की शुरुआत से उम्मीद है कि तुर्कभाषी समाजों द्वारा अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित, प्रदर्शित और वैश्विक समुदाय के साथ साझा करने के प्रयास और मजबूती से आगे बढ़ेंगे।




