भारत में पहली बार विकसित हुई 3 MWh वैनेडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी, केंद्रीय मंत्री ने किया शुभारंभ

ग्रेटर नोएडा
भारत ने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
केंद्रीय विद्युत और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा में देश की पहली मेगावॉट-घंटा (MWh) स्तर की वैनेडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी (VRFB) का उद्घाटन किया।
यह अभिनव तकनीक भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के कुशल भंडारण और ग्रिड स्थिरता के नए युग में प्रवेश कराती है।
NTPC की NETRA इकाई ने किया विकास
इस 3 MWh क्षमता वाली बैटरी का विकास NTPC (नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन) की अनुसंधान इकाई NETRA — नेशनल एनर्जी टेक्नोलॉजी रिसर्च एलायंस द्वारा किया गया है।
इसका उद्देश्य है कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों को लंबी अवधि तक स्टोर करने और स्थायी रूप से ग्रिड में एकीकृत किया जा सके।
NETRA के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रौद्योगिकी भारत की “दीर्घावधि ऊर्जा भंडारण (Long Duration Energy Storage)” रणनीति का अहम हिस्सा बनेगी।
क्या है वैनेडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी (VRFB)?
वैनेडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी में वैनेडियम आयन के विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं का उपयोग किया जाता है, जो विद्युत ऊर्जा को कुशलता से संग्रहित और मुक्त करने में मदद करता है।
यह प्रणाली लिथियम-आयन बैटरियों से कहीं अधिक टिकाऊ है और
इसकी परिचालन आयु 10-15 वर्ष तक हो सकती है।
इसके अलावा,
इसमें प्रयुक्त गैर-ज्वलनशील इलेक्ट्रोलाइट्स इसे पूरी तरह सुरक्षित बनाते हैं।
इसकी संरचना को मॉड्यूलर तरीके से बढ़ाया या घटाया जा सकता है, जिससे यह ग्रिड-स्तरीय प्रोजेक्ट्स के लिए उपयुक्त है।
भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण
भारत में तेजी से बढ़ रही सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता के साथ सबसे बड़ी चुनौती है — “भंडारण और आपूर्ति संतुलन”।
VRFB जैसी उन्नत बैटरियां इस चुनौती का समाधान दे सकती हैं।
यह तकनीक न केवल ग्रिड स्थिरता और पीक-लोड प्रबंधन में मदद करेगी,
बल्कि माइक्रोग्रिड ऑपरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजनाओं में भी उपयोगी साबित होगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा — “सस्टेनेबल एनर्जी स्टोरेज की दिशा में मील का पत्थर”
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि
“यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत अब सिर्फ नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादक ही नहीं, बल्कि उसे स्थायी रूप से संग्रहीत करने में भी सक्षम बन चुका है।”
उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में NTPC और ऊर्जा मंत्रालय देशभर में इस तकनीक को
ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में लागू करने की दिशा में काम करेंगे।




