बिलासपुर

राष्ट्रीय परिसंवाद के मंच पर हंगामा, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति पर साहित्यकार के अपमान का आरोप

रिपोर्टर:- मुरली नायर
लोकेशन:-बिलासपुर, छत्तीसगढ़


बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों में घिर गया है। 7 जनवरी को विश्वविद्यालय परिसर में “समकालीन हिंदी कहानी” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने अकादमिक गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस राष्ट्रीय परिसंवाद में देश के विभिन्न राज्यों से आए जाने-माने साहित्यकार, शोधार्थी और प्राध्यापक शामिल हुए थे। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक कुमार चक्रवाल ने की। आरोप है कि अपने उद्घाटन वक्तव्य में कुलपति निर्धारित विषय पर चर्चा करने के बजाय अपने व्यक्तिगत अनुभवों और विचारों को लंबे समय तक साझा करते रहे। इस दौरान वे मंच से बार-बार उपस्थित साहित्यकारों से अपनी बातों पर प्रतिक्रिया भी मांगते रहे।

इसी बीच महाराष्ट्र से आए प्रसिद्ध साहित्यकार मनोज रूपड़ा ने शालीन और सम्मानजनक तरीके से कुलपति से विषय पर लौटने का आग्रह किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस टिप्पणी से कुलपति नाराज़ हो गए और उन्होंने मंच से ही मनोज रूपड़ा को अपमानित करते हुए कार्यक्रम से बाहर जाने को कह दिया। इतना ही नहीं, कुलपति ने यह भी टिप्पणी की कि जिन्हें कार्यक्रम से आपत्ति है, वे भी सभागार छोड़ सकते हैं।
पूरा घटनाक्रम सभागार में मौजूद प्रतिभागियों के सामने हुआ, जिससे कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया। कई साहित्यकार और श्रोता असहज नजर आए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद अकादमिक और साहित्यिक जगत में इस घटना की आलोचना शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान में विचारों के आदान-प्रदान और असहमति के लिए सम्मानजनक वातावरण होना चाहिए। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन विवाद गहराता नजर आ रहा है।

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