अंबिकापुर में SECL की अमेरा खदान पर बवाल: ग्रामीणों का उग्र विरोध हिंसक

40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल; विस्थापन और संवादहीनता बना टकराव की जड़
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सोमवार सुबह साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की अमेरा ओपनकास्ट खदान में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब खनन कार्य के बीच ग्रामीणों ने अचानक घुसपैठ कर खुदाई रोकने की कोशिश की। कोयला खदान विस्तार का विरोध कर रहे ग्रामीणों और पुलिस बल के बीच हुई झड़प में 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि कई ग्रामीणों को भी चोटें आईं।
अंबिकापुर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित इस इलाके में परसोढ़ी कला, लम्बुआ और आसपास के गांवों के 300 से अधिक ग्रामीण—जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं थीं—सुबह 8 बजे खदान में चल रही तीन पोकलेन मशीनों की खुदाई रोकने पहुंच गए। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान विस्तार से उनकी कृषि भूमि, जंगल और आजीविका पूरी तरह नष्ट हो जाएगी, लेकिन उनकी आपत्तियों को लगातार अनसुना किया जा रहा है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बातचीत की कोशिश की, लेकिन स्थिति हाथ से निकलती गई। ग्रामीण लाठियों, डंडों और आसपास पड़े कोयले के टुकड़ों से लैस होकर सुरक्षा बलों पर टूट पड़े। पत्थरबाजी इतनी तीव्र थी कि पुलिस की सेफ्टी शील्ड भी बेअसर साबित हुई और जवानों को पीछे हटना पड़ा।

विरोध के राजनीतिक स्वर तेज, कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए
घटना के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार की नीति और रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि यह विवाद केवल एक खदान का मुद्दा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत है।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, आदिवासी समुदाय अपनी जमीन और भविष्य की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है, लेकिन सरकार ने संवाद की बजाय बल प्रयोग का रास्ता चुना। उनका आरोप है कि खदान विस्तार को हर कीमत पर आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है, जबकि प्रभावित परिवारों की बात सुनने की कोई कोशिश नहीं की गई।
पार्टी ने यह भी कहा कि खनन क्षेत्र में पीढ़ियों से बसे परिवारों को विस्थापन का खतरा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को शामिल नहीं किया गया।

स्थानीय प्रशासन और SECL ने कहा—असमंजस दूर कर समाधान की कोशिश करेंगे
वहीं प्रशासन ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है और आगे किसी भी तरह की हिंसा रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई है। SECL प्रबंधन का कहना है कि परियोजना से जुड़े सभी मुद्दों पर ग्रामीणों से संवाद जारी रहेगा और विस्थापन, मुआवजा तथा पुनर्वास से जुड़े मामलों पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
जवान और ग्रामीण दोनों घायल—मुद्दा समाधान की मांग पर अटका
घटना ने एक बार फिर खनन विस्तार, भूमि अधिग्रहण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों पर चल रही बहस को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि खदान विस्तार पर निर्णय लेते समय पारदर्शिता, जनसंवाद और उचित पुनर्वास व्यवस्था बेहद आवश्यक है, अन्यथा ऐसे टकराव बढ़ते रहेंगे।
अभी स्थिति तनावपूर्ण तो है, लेकिन सभी पक्षों की सहमति के बिना खदान परियोजना आगे बढ़ना मुश्किल दिख रहा है। स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है—विकास जरूरी है, लेकिन उनकी जमीन और भविष्य की कीमत पर नहीं।




