आरक्षित वन के नाम पर गांव की जमीन पर खतरा, कमरीद के ग्रामीणों का प्रशासन के खिलाफ फूटा आक्रोश

रिपोर्टर – शुभांशु मिश्रा
लोकेशन – जांजगीर-चाम्पा, छत्तीसगढ़
आरक्षित वन के नाम पर गांव की जमीन छीने जाने का आरोप अब जांजगीर-चाम्पा में एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।
ग्राम पंचायत कमरीद की जिस भूमि को राज्य शासन ने अधिसूचना जारी कर आरक्षित वन घोषित किया है, उसी भूमि को लेकर अब ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों तक पहुंचने की चेतावनी दे रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सितंबर 2025 में वन विभाग ने पंचायत से एनओसी मांगी थी, लेकिन ग्राम पंचायत ने किसी भी तरह की अनापत्ति नहीं दी।
इसके बावजूद, बिना ग्रामसभा की अनुमति और बिना ग्रामीणों को जानकारी दिए फाइलें आगे बढ़ती रहीं।
जनवरी 2026 में जब इस पूरे मामले की जानकारी ग्रामीणों को लगी, तो गांव के सभी वर्ग एकजुट होकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।
लेकिन आरोप है कि कलेक्टर ने यह कहकर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया कि — “अब इस पर कुछ नहीं किया जा सकता।”
इस जवाब के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और प्रशासन पर उनकी आवाज दबाने का आरोप लगाया जा रहा है।
ग्रामीणों का साफ कहना है —
“हम पर्यावरण संरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने गांव की जमीन पर जबरन कब्जा स्वीकार नहीं करेंगे।”
ग्रामीणों के मुताबिक, यदि यह भूमि वन विभाग को सौंप दी गई तो
मवेशियों के चरागाह खत्म हो जाएंगे
पंचायत के विकास कार्य बाधित होंगे
भविष्य की आवास, सड़क और सामुदायिक जरूरतों पर सीधा असर पड़ेगा
गौरतलब है कि अधिसूचना के अनुसार ग्राम कमरीद, पटवारी हल्का क्रमांक 11 के खसरा नंबर 620/1 सहित कुल 34.801 हेक्टेयर भूमि को तीन पैचों में आरक्षित वन घोषित किया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह फैसला पूरी तरह जमीनी सच्चाई से कटकर लिया गया है।
फिलहाल गांव में स्थिति शांत है, लेकिन आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी सहमति के बिना जमीन पर कोई भी कार्य शुरू हुआ, तो वे संगठित आंदोलन, ज्ञापन और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर तक संघर्ष करेंगे।
यह मामला अब सिर्फ वृक्षारोपण या वन भूमि का नहीं,
बल्कि गांव के अस्तित्व, आजीविका और अधिकारों से जुड़ चुका है।




