हाइड्रो पावर प्लांट पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा — घटोरिया मंदिर तोड़े जाने का आरोप, पुनर्निर्माण न होने से भड़के श्रद्धालु

सूरजपुर
रिपोर्टर — सुरेन्द्र साहू
सूरजपुर जिले के भैयाथान क्षेत्र में हाइड्रो पावर प्लांट के निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य के दौरान पासल ग्राम के जंगल में स्थित घटोरिया मंदिर, जो उनकी आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र था, उसे तोड़ दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर सदियों से उनके विश्वास का प्रतीक रहा है, जहां हर साल पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते थे। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में की गई मन्नतें हमेशा पूरी होती थीं, इसलिए गांव और आसपास के इलाकों में इसका विशेष धार्मिक महत्व रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि जब पावर प्लांट का निर्माण शुरू हुआ था, तब कंपनी प्रबंधन ने यह आश्वासन दिया था कि मंदिर को किसी अन्य स्थान पर पुनर्निर्मित कराया जाएगा, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद कंपनी ने अपना वादा पूरा नहीं किया।
गांववालों का आरोप है कि उन्होंने कई बार कंपनी अधिकारियों से मंदिर पुनर्निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में गहरी नाराजगी व्याप्त है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि—
“विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन विकास के नाम पर हमारी आस्था और धार्मिक पहचान को मिटाया नहीं जा सकता।”
इस पूरे मामले पर तहसीलदार शिव नारायण राठिया ने भी स्थिति का संज्ञान लिया है और कंपनी प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे।
इस बीच, गांव के कई बुजुर्ग और महिला श्रद्धालु भी सामने आए हैं जिन्होंने बताया कि घटोरिया मंदिर सिर्फ ईंट और पत्थर नहीं, बल्कि उनकी पीढ़ियों की आस्था का प्रतीक है।




