जांजगीर-चांपा

रासेयो इकाई सुखरीकला के स्वयंसेवकों ने सीखी बांस हस्तशिल्प कला – ग्रामीण हुनर से सीखा आत्मनिर्भरता का पाठ

स्थान: चांपा / सुखरीकला

रिपोर्टर: (आपका नाम / ब्यूरो रिपोर्ट)

दिनांक: 10 नवम्बर 2025

चांपा के सुखरीकला से एक प्रेरक खबर सामने आई है। यहाँ राष्ट्रीय सेवा योजना (रासेयो) इकाई के स्वयंसेवकों ने ग्राम भदरापाली जाकर बांस हस्तशिल्प कला सीखी। ग्रामीण कारीगरों से इस पारंपरिक कला को सीखकर युवाओं ने न सिर्फ हुनर का अनुभव हासिल किया बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक छोटा लेकिन अहम कदम बढ़ाया है।

राष्ट्रीय सेवा योजना (रासेयो) इकाई सुखरीकला के स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम अधिकारी आर.के. राठौर एवं सहायक कार्यक्रम अधिकारी एम.आर. राज के मार्गदर्शन में तथा संस्था प्रमुख प्राचार्य बी.एल. चौधरी के निर्देशन में समीपस्थ ग्राम भदरापाली (बहेराडीह) का भ्रमण किया।

यहां ग्रामीण क्षेत्र की बंसोर जाति के लोगों ने स्वयंसेवकों को बांस हस्तशिल्प कला का प्रशिक्षण दिया। ग्रामीण कारीगरों ने दिखाया कि किस तरह से साधारण बांस से उपयोगी वस्तुएं जैसे सूपा, पर्रा, टोकनी, झउहा, छिपी, मछली पकड़ने की जाल, ट्री गार्ड, फूलदान, पेनदान, चटाई, हाथ पंखा, सोफा, कुर्सी और झूले जैसे फर्नीचर तैयार किए जाते हैं।

रासेयो स्वयंसेवकों — आर्यन टंडन, रघुबीर सिंह कंवर, गौकरण, जागृति मन्नेवार, कंचन, किरण, कृति, प्राची, नम्रता बरेठ, अंजलि, दुर्गेश्वरी कश्यप, निशा बरेठ सहित अन्य छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया और बांस से बनी उपयोगी वस्तुएं स्वयं तैयार कीं।

कार्यक्रम में विद्यालय की व्याख्याता श्रीमती मौसमी अवस्थी और श्रीमती अनीता साहू ने विशेष सहयोग दिया। उन्होंने बालिका स्वयंसेवकों को बांस की टोकरी बनाने का प्रशिक्षण भी दिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में एल.एन. सोनकर सहित विद्यालय के अन्य शिक्षकों एवं स्वयंसेवकों का सक्रिय सहयोग रहा।

गौरतलब है कि ग्राम भदरापाली के बंसोर समाज के लोग वर्षों से बांस हस्तशिल्प को जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन बनाए हुए हैं। वे स्थानीय किसानों से कच्चा बांस खरीदकर उपयोगी एवं सजावटी वस्तुएं बनाते हैं और बाजार में बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं।

यह पहल रासेयो के स्वयंसेवकों के लिए ग्रामीण कला, परंपरा और स्वावलंबन का एक जीवंत उदाहरण साबित हुई।

ग्रामीण हुनर से युवाओं ने सीखा आत्मनिर्भरता का पाठ — बांस हस्तशिल्प बना रोजगार और संस्कृति का संगम

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