जांजगीर-चांपा

जनता का प्रतीक्षालय बना गोदाम, कलेक्टर कार्यालय में अव्यवस्था पर उठे सवाल

रिपोर्टर:- दीपक यादव
लोकेशन:- जांजगीर-चांपा
दिनांक:- 27/01/2026


जिस जगह पर आम जनता की उम्मीदें बैठा करती थीं…
जहां दूर-दराज़ गांवों से आए लोग अपनी फरियाद लेकर धैर्यपूर्वक इंतजार करते थे…
आज वही जगह प्रशासनिक अव्यवस्था की तस्वीर बन चुकी है।

जांजगीर-चांपा जिले के कलेक्टर कार्यालय का प्रतीक्षालय, जो आम जनता की सुविधा के लिए बनाया गया था, अब गोदाम में तब्दील हो गया है।
ये तस्वीरें जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक भवन की हैं, जहां व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांजगीर-चांपा जिले के कलेक्टर कार्यालय परिसर में बना प्रतीक्षालय, जहां कभी किसान, मजदूर, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी समस्याएं लेकर बैठते थे, आज फाइलों, फर्नीचर और कार्यालयीन सामान से पूरी तरह भर दिया गया है।
स्थिति यह है कि आम लोगों का यहां बैठना तो दूर, अंदर प्रवेश तक संभव नहीं हो पा रहा।

दूर-दराज़ ग्रामीण इलाकों से आने वाले फरियादी कलेक्टर से मिलने की अनुमति मिलने तक इसी प्रतीक्षालय में इंतजार करते थे, लेकिन अब उन्हें धूप, बारिश और ठंड में बाहर खड़ा रहना पड़ रहा है।
इससे बुजुर्गों, बीमारों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

फरियादी की प्रतिक्रिया:
“प्रतीक्षालय जनता के लिए बना था, सामान रखने के लिए नहीं। बुजुर्ग और बीमार लोगों को घंटों बाहर खड़ा रहना पड़ता है।”
लोगों का कहना है कि प्रशासनिक भवन में यदि जगह की कमी है, तो उसका समाधान जनता की सुविधा छीनकर नहीं किया जाना चाहिए।
प्रतीक्षालय का गोदाम में तब्दील होना प्रशासनिक अव्यवस्था और संवेदनहीनता को दर्शाता है।
अब आम जनता को कलेक्टर जैसे संवेदनशील पद पर बैठे अधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की उम्मीद है।
लोग चाहते हैं कि प्रतीक्षालय को दोबारा जनता के लिए खोला जाए और कार्यालयीन सामान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
प्रशासन का उद्देश्य जनता की सेवा है, लेकिन जब वही जनता अपनी बुनियादी सुविधा से वंचित हो जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस अव्यवस्था को कब तक सुधारता है और आमजन को उनका प्रतीक्षालय कब वापस मिलता है।

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