जब दुनिया मंदी की मार झेल रही, भारत रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार से आगे बढ़ रहा—PM मोदी की बात को आंकड़े भी दे रहे हैं समर्थन

नई दिल्ली
वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और मंदी के दबाव से जूझ रही है, लेकिन इसी दौर में भारत की विकास गाड़ी पहले से कहीं तेज रफ्तार पकड़ती दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को HT समिट में देश की मजबूत आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि “जब दुनिया स्लोडाउन की बात कर रही है, भारत असाधारण ग्रोथ की कहानी लिख रहा है।”
उन्होंने 8% के आस-पास की GDP वृद्धि दर का हवाला देते हुए बताया कि भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
PM मोदी ने क्या कहा?
समिट में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का परिवर्तन अब केवल ‘संभावना’ नहीं, बल्कि “यह बदलती सोच, बदलते जीवन और नए भारत की दिशा का जीवंत प्रमाण” है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन, इकोनॉमिक पावरहाउस और स्टेबल इकोनॉमी के रूप में देख रही है।
PM मोदी ने ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा
“हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ तब कहा गया जब भारत 2–3% की विकास दर के लिए तरसता था। आज भारत 8% की ग्रोथ कर रहा है—इस समय कोई भी इसे हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ नहीं कह सकता।”
उनका कहना है कि आज भारत का बढ़ता आत्मविश्वास ही देश को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद आर्थिक शक्ति की तरह स्थापित कर रहा है।
आंकड़ों से समझिए—भारत की ग्रोथ कहानी क्यों है खास?
1. GDP ग्रोथ 8% के पास वित्त वर्ष 2024–25 की तिमाहियों में GDP ग्रोथ 7.8% से 8% के दायरे में रही। यह G20 देशों में सबसे तेज वृद्धि है।
2. निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड उछाल कैपेक्स में लगातार 30–35% की सरकारी वृद्धि। हाईवे, रेल, पोर्ट और एयरपोर्ट विकास कार्यों में विशाल निवेश।
3. FDI और ग्लोबल इंटरेस्ट बना हुआ दुनिया की बड़ी टेक, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी कंपनियाँ भारत को प्राथमिक निवेश गंतव्य मान रही हैं।FDI इनफ्लो लगातार मजबूती दिखा रहे हैं।
4. सर्विस सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग दोनों मजबूत IT, फाइनेंस, टूरिज्म और डिजिटल सेवाएँ ग्रोथ को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। PLI स्कीम के कारण मैन्युफैक्चरिंग में ऐतिहासिक उछाल।
5. भारत की स्थिरता और जनसंख्या लाभ राजनीतिक स्थिरता, युवा कार्यबल और तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम भारत को वैश्विक स्तर पर बढ़त दिला रहा है।
क्यों भारत दुनिया का ग्रोथ इंजन माना जा रहा?
वैश्विक मंदी के बीच भी मांग, उपभोक्ता खर्च और निवेश मजबूत। IMF, World Bank और OECD—सभी संस्थाएँ भारत को आने वाले वर्षों में ग्लोबल इकोनॉमी की बैकबोन मानती हैं। दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाएँ 0–2% की ग्रोथ पर अटकी हैं, वहीं भारत 7–8% की ग्रोथ के साथ पूरी दुनिया में सबसे आगे है।




