जांजगीर-चांपा

डोंगाकोहरौद में जंगली सूअर का कहर! दिशा मैदान गई महिला पर खूनी हमला — प्रशासन नींद में, ग्रामीणों में दहशत चरम पर

रिपोर्टर — दीपक यादव

लोकेशन — जांजगीर-चांपा

दिनांक — 23/11/2025

डोंगाकोहरौद, पामगढ़

छत्तीसगढ़ के पामगढ़ क्षेत्र से आज सुबह ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे इलाके को हिला दिया। गांव की कमला बाई पर सुबह दिशा मैदान जाते वक्त एक जंगली सूअर ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया। अंधेरे में हुए इस हमले ने प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा इंतज़ामों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

घटना: सुबह 5:30 बजे, गहरा अंधेरा, और अचानक मौत जैसा हमला

मंगलवार भोर में, ठंडी और धुंध से ढकी सुबह…

कमला बाई अपनी रोज़ की तरह नहर किनारे की ओर दिशा मैदान के लिए निकली थीं। सूरज अभी निकला नहीं था और मरघट्टी के पास घना अंधेरा था। तभी झाड़ी से एक जंगली सूअर तेजी से निकला और बिना किसी चेतावनी के कमला बाई पर टूट पड़ा।

सूअर ने दांत और पंजों से कई वार किए —

चेहरे पर गहरे कट

नाक के हिस्से में गंभीर चोट

खून से लथपथ हालत

कमला बाई दर्द से चिल्लाईं, पर आसपास कोई नहीं था। कुछ देर बाद दूर से गुजर रहे ग्रामीणों ने आवाज सुनी और भागकर पहुंचे। परिवार को सूचना दी गई और महिला को तुरंत पामगढ़ के निजी अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टरों के अनुसार—

“चेहरे पर गंभीर घाव हैं, मगर आंख और गले तक नुकसान पहुंचना टल गया, वरना स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी।”

कुछ घंटों के इलाज के बाद महिला की हालत स्थिर हुई और उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन अभी निरंतर मेडिकल निगरानी की जरूरत है।

परिवार का दर्द — “दो मिनट और देर होते तो शायद बचाना मुश्किल था

कमला बाई के बेटे ने बताया:

“मां दिशा मैदान गई थीं। अचानक सूअर ने हमला कर दिया। जब पहुंचें तो मां खून से भीगी पड़ी थीं। अगर कुछ मिनट और देर हो जाती तो कुछ भी हो सकता था।”

ग्रामीणों में दहशत — “कुछ दिनों से सूअरों की आवाजाही बढ़ गई थी

डोंगाकोहरौद और आसपास के गांवों में दहशत साफ दिखाई दे रही है।

● गांवों में जंगली सूअरों का दखल बढ़ा

● किसानों की फसलें नुकसान में

● सुबह-शाम निकलना खतरे से खाली नहीं

● बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर डर

ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है।

पुलिस और वन विभाग एक्शन में — गश्त बढ़ाने के आदेश

घटना की जानकारी मिलते ही:

पामगढ़ थाना पुलिस

वन विभाग की टीम

तुरंत मौके पर पहुंची।

टीम ने इलाके का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से बातचीत की।

वन विभाग ने बताया कि ठंड और फसल कटाई के मौसम में जंगली सूअरों की गतिविधि बढ़ जाती है। भोजन की तलाश में ये आबादी की ओर बढ़ते हैं जिससे ऐसे हमले आम हो रहे हैं।

वन विभाग ने कमला बाई को तत्काल राहत स्वरूप 3000 रुपये की सहायता राशि भी दी है।

साथ ही विस्तृत रिपोर्ट बनाकर मुआवजा प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

वन विभाग की चेतावनी — सुबह अंधेरे में अकेले न निकलें

जंगल से लगे गांवों के लिए अहम सुझाव:

सूर्योदय के बाद ही बाहर निकलिए

झाड़ियों में हलचल दिखे या आवाज आए तो दूर हटें

मोबाइल की टॉर्च या बैटरी लाइट साथ रखें

अकेले न जाएं — समूह में चलें

पशुओं का चारा खुले में न छोड़ें

ये छोटी सावधानियाँ बड़ी घटनाओं को रोक सकती हैं।

बड़ा सवाल — कब तक गांवों में वन्यजीव बेखौफ घूमते रहेंगे?

डोंगाकोहरौद की ये घटना एक बार फिर सतर्क करती है कि जंगल और मानवीय बस्तियों की दूरी कम होने से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता जा रहा है।

आज कमला बाई की जान बच गई…

लेकिन अगर प्रशासन समय रहते मजबूत कदम न उठाए, तो अगली घटना और भी भयावह हो सकती है।

फिलहाल पुलिस और वन विभाग ने इलाके में गश्त और जागरूकता अभियान तेज करने का फैसला लिया है।

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