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बस्तर में बदलाव की बयार: ग्रामीणों ने उठाई नक्सल-मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग

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छत्तीसगढ़ का नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र अब बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रहा है। लंबे समय तक नक्सली हिंसा, डर और अस्थिरता झेल चुके कई गांवों के ग्रामीणों ने अब सुरक्षा बलों और सरकार से अपने इलाकों को नक्सल-मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में हालात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब गांवों में शांति का माहौल लौटता नजर आ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की सक्रियता तथा बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण से क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां काफी हद तक थम गई हैं। पहले जहां डर के साए में जीवन गुजरता था, वहीं अब बच्चे स्कूल जा रहे हैं, बाजार फिर से गुलजार होने लगे हैं और विकास कार्यों में तेजी आई है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि अब वे बिना भय के अपने खेतों में काम कर पा रहे हैं और गांव में सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलने लगा है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकार बस्तर के इन क्षेत्रों को नक्सल-मुक्त घोषित करती है, तो विकास की रफ्तार और तेज होगी और बाहरी निवेश व रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालात पूरी तरह स्थिर होने के बाद ही किसी क्षेत्र को नक्सल-मुक्त घोषित करने का निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया है कि बस्तर के कई इलाकों में हालिया समय में सुरक्षा स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिला है।

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