कोरबा

बिना वर्दी, बिना नेम प्लेट, फिर भी डंडा चला रही पुलिस — उरगा में कानून की धज्जियां

कोरबा जिले के उरगा थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ कानून के रखवाले ही कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं।
यह तस्वीरें और आरोप आरक्षक अजय यादव पर हैं…
जो कथित तौर पर बिना पुलिस वर्दी, बिना नेम प्लेट और बिना किसी वैध आदेश के सड़क पर राहगीरों और बाइक सवारों को डंडे से मारते हुए दिखाई दे रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
पुलिस को यह अधिकार आखिर किसने दिया?
किस कानून के तहत सड़क पर डंडा चलाया जा रहा है?

और सबसे बड़ा सवाल यही है—
जब एक चलती बाइक पर सवार युवक को डंडे से मारा जा रहा था,
अगर उसी दौरान बाइक असंतुलित होकर गिर जाती,
अगर युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो जाता,
या उसकी जान तक चली जाती—
तो आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
क्या तब भी कहा जाता कि यह “रूटीन चेकिंग” थी?
क्या तब भी वीडियो डिलीट करवा दिए जाते?
या फिर एक और मामला “दुर्घटना” बताकर फाइलों में दफना दिया जाता?

चौंकाने वाली बात ये है कि
ना कोई दंगा,
ना कोई आपात स्थिति,
ना ही किसी प्रकार की लाठीचार्ज की अनुमति…
फिर भी आम नागरिकों पर खुलेआम बल प्रयोग!
प्रत्यक्षदर्शियों और शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह चेकिंग नहीं, बल्कि डर के दम पर की जा रही कार्रवाई और अवैध वसूली का तरीका था।

मोटर व्हीकल एक्ट और पुलिस मैनुअल साफ़ कहते हैं कि
चेकिंग के दौरान पुलिस का वर्दी में होना अनिवार्य है
नेम प्लेट और पहचान स्पष्ट दिखनी चाहिए
बल प्रयोग सिर्फ विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है
लेकिन यहाँ…
हर नियम को ताक पर रख दिया गया।
इतना ही नहीं…
जब एक युवक ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाना शुरू किया,
तो आरोप है कि
आरक्षक अजय यादव और उनके साथियों ने युवक से मारपीट की,
उसे जबरन थाने ले जाया गया
और वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया गया।

क्या अब
सच्चाई दिखाना अपराध बन गया है?
वीडियो बनाना जुर्म हो गया है?
और क्या आम आदमी के अधिकार सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गए हैं?
पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कोरबा से निष्पक्ष जांच और दोषी आरक्षक पर सख़्त कार्रवाई की मांग की है।
अब सवाल ये है—
क्या खाकी के भीतर बैठे दोषियों पर गाज गिरेगी?
या फिर ये मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?
हम इस खबर पर नजर बनाए रखेंगे…
क्योंकि सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं,
कानून और लोकतंत्र की गरिमा का है।

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